Israels First Use Of Iron Beam Laser Weapon Activated To Counter Iranian Attacks
इस्राइल ने पहली बार किया आयरन बीम का इस्तेमाल
नवभारत टाइम्स•
इस्राइल ने पहली बार ईरान के हमलों को रोकने के लिए आयरन बीम का प्रयोग किया है। यह नई तकनीक दो महीने पहले ही इजरायल डिफेंस फोर्सेस को मिली है। आयरन बीम एक डायरेक्ट एनर्जी वेपन है जो दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट को 10 किलोमीटर दूर से ही लेजर से नष्ट कर देता है।
ईरान के हमलों को रोकने के लिए इस्राइल ने पहली बार 'आयरन बीम' का इस्तेमाल किया है। यह डायरेक्ट एनर्जी वेपन है, जिसे हाल ही में इजरायल डिफेंस फोर्सेस को मिला है। यह लेजर तकनीक पर काम करता है और दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल या रॉकेट को 10 किलोमीटर दूर से ही नष्ट कर सकता है। इसका रिएक्शन टाइम सिर्फ कुछ सेकंड का है।
इस्राइल ने ईरान की तरफ से हो रहे हमलों का जवाब देने के लिए एक नई और शक्तिशाली तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस्राइल की सेना ने पहली बार 'आयरन बीम' नामक डायरेक्ट एनर्जी वेपन का प्रयोग किया है। यह हथियार दो महीने पहले ही इजरायल डिफेंस फोर्सेस को सौंपा गया था। एनबीटी रिपोर्टर ने पिछले साल दिसंबर में इस्राइल की यात्रा के दौरान इस 'आयरन बीम' को देखा था। तब इसे बनाने वाली इजरायली कंपनी राफेल ने इसका प्रदर्शन किया था।'आयरन बीम' एक डायरेक्ट एनर्जी वेपन है, जिसे ' आयरन डोम ' सिस्टम में जोड़ा गया है। यह लेजर तकनीक पर आधारित है। इसमें दो टेलिस्कोप लगे होते हैं। एक टेलिस्कोप से लेजर बीम निकलती है, जो दुश्मन के लक्ष्य को भेदती है। दूसरे टेलिस्कोप से इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाती है। इसकी मारक क्षमता 10 किलोमीटर तक है। जब 10 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन का ड्रोन, मिसाइल या रॉकेट आता दिखाई देता है, तो 'आयरन बीम' उसे तुरंत पकड़ लेता है और लेजर से उसे नष्ट कर देता है। यह सब कुछ ही सेकंड में हो जाता है।
'आयरन बीम' की एक खास बात यह है कि यह 'आयरन डोम' के साथ मिलकर काम कर सकता है, लेकिन यह एक अलग यूनिट के तौर पर भी काम करने में सक्षम है। हालांकि, इसका वजन ज्यादा होने के कारण यह मोबाइल नहीं है। इसे एक ही जगह पर स्थापित करके इस्तेमाल किया जा सकता है। 'आयरन डोम' सिस्टम में पहले से ही कम पावर वाले 'आयरन बीम' के वेरिएंट शामिल हैं। 10 किलोवाट हाई लेजर पावर सिस्टम वाली लाइट बीम की रेंज ढाई किलोमीटर है, जबकि 50 किलोवाट लाइट बीम की रेंज 5 किलोमीटर है। ये दोनों वेरिएंट मोबाइल हैं, यानी इन्हें आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।
यह तकनीक भारत के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। भारत भी डायरेक्ट एनर्जी वेपन पर काम कर रहा है। डायरेक्ट एनर्जी वेपन तीनों भारतीय सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) की विश लिस्ट में शामिल है। इसका मतलब है कि भारतीय सेनाएं भी इस तरह के आधुनिक हथियारों को अपने बेड़े में शामिल करना चाहती हैं। यह तकनीक भविष्य में रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।