रक्तदान शिविरों में ड्यूटी लगने से नाराज़ नर्सों ने जताया विरोध

नवभारत टाइम्स

जींद के नागरिक अस्पताल की नर्सिंग ऑफिसर रक्तदान शिविरों में ड्यूटी लगने से नाराज हैं। उनका कहना है कि इससे वार्डों में मरीजों की देखभाल प्रभावित होती है। स्वास्थ्य अधिकारी रक्तदान शिविरों को अस्पताल के लिए महत्वपूर्ण बता रहे हैं। इस मुद्दे पर नर्सिंग ऑफिसर और अस्पताल प्रशासन के बीच खींचतान जारी है।

रक्तदान शिविरों में ड्यूटी लगने से नाराज़ नर्सों ने जताया विरोध
जींद के नागरिक अस्पताल में नर्सिंग ऑफिसर की ड्यूटी रक्तदान शिविरों में लगाए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। सोमवार को नर्सिंग ऑफिसर अस्पताल के गेट के बाहर इकट्ठा होकर अपना विरोध जताया। उन्होंने कहा कि रक्तदान शिविरों में ड्यूटी लगने से उनके वार्ड का काम प्रभावित होता है, जिससे मरीजों की देखभाल में दिक्कत आती है। वहीं, स्वास्थ्य अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि रक्तदान शिविर अस्पताल के लिए बहुत ज़रूरी हैं क्योंकि इनसे ही अस्पताल को रक्त मिलता है। इस वजह से, रक्तदान शिविरों में ड्यूटी को लेकर नर्सिंग ऑफिसर और अस्पताल प्रशासन के बीच खींचतान जारी है।

नर्सिंग ऑफिसर सोमवार को नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग के सामने जमा हुईं। सीनियर नर्सिंग ऑफिसर शारदा ने बताया कि जब स्टाफ नर्स की ड्यूटी रक्तदान शिविर में लगती है, तो उनके वार्ड में भर्ती मरीजों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्होंने उच्च अधिकारियों को भी सूचित किया था, लेकिन इसके बावजूद उनकी ड्यूटी रक्तदान शिविरों में लगा दी जाती है। इससे स्टाफ नर्सों को भी दिक्कत होती है और वार्ड में मरीजों की संख्या ज़्यादा होने पर काम का दबाव बढ़ जाता है।
शारदा ने बताया कि रविवार को लगे रक्तदान शिविर में आठ नर्सिंग ऑफिसर गई थीं। इनमें से दो नियमित स्टाफ की थीं और छह एनएचएम (National Health Mission) के तहत काम करने वाली नर्सिंग ऑफिसर थीं। इसके बावजूद, उन पर काम का दबाव और बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रक्तदान शिविरों में अन्य कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई जाती है। नर्सिंग ऑफिसर हर दिन अपने वार्ड में मरीजों की देखभाल करती हैं।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने जिस तरह का व्यवहार किया, वह नर्सिंग ऑफिसर को सम्मानजनक नहीं लगा। उन्होंने कहा कि जब नर्सिंग ऑफिसर अधिकारियों का सम्मान करती हैं, तो वे भी अपने सम्मान की उम्मीद रखती हैं। यह पूरा मामला अस्पताल में काम के बंटवारे और कर्मचारियों के बीच तालमेल की कमी को उजागर करता है।