Green Corridor On La Martiniere College Land Dm Lucknow Summoned Strict Action By High Court
DM लखनऊ तलब
नवभारत टाइम्स•
ला मार्टिनियर कॉलेज की जमीन पर ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत सड़क निर्माण को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी लखनऊ को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। कॉलेज का आरोप है कि बिना कानूनी प्रक्रिया के उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है।
लखनऊ: ला मार्टिनियर कॉलेज की जमीन पर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सड़क बनाने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर जमीन की पैमाइश (नाप-जोख) के आदेश का पालन नहीं हुआ तो डीएम को जवाब देना होगा और उन पर अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है। यह मामला 'ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट' के तहत कॉलेज की जमीन पर सड़क और फ्लाईओवर बनाने से जुड़ा है।
ला मार्टिनियर कॉलेज ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि सरकार उनकी कोठी मार्टिन साहब और गणेशगंज स्टेशन इलाके की मालिकाना हक वाली जमीनों पर 'ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट' के तहत सड़क और फ्लाईओवर बना रही है। कॉलेज का कहना है कि LDA, जिला प्रशासन या राज्य सरकार ने इस जमीन के लिए न तो उनकी सहमति ली है और न ही जमीन अधिग्रहण की कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। कॉलेज का आरोप है कि उनकी जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 27 फरवरी को एक अहम आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि एसडीएम सदर, राज्य सरकार के अधिकारी और कॉलेज के प्रतिनिधि मिलकर जमीन की पैमाइश करें और उसकी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपें। लेकिन, सोमवार को जब कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई तो सरकारी वकील ने बताया कि पैमाइश की प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई है। यह सुनकर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई और सीधे लखनऊ के जिलाधिकारी को तलब कर लिया।
कॉलेज की ओर से कोर्ट में एक पत्र भी पेश किया गया। यह पत्र LDA वीसी ने मुख्य सचिव को 27 फरवरी को भेजा था। खास बात यह है कि मुख्य सचिव ला मार्टिनियर चैरिटीज के पदेन वरिष्ठ ट्रस्टी भी हैं। इस पत्र में कॉलेज की जमीन पर नौ पिलर बनाने की सहमति मांगी गई थी। कॉलेज का कहना है कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया को पूरा किए इस तरह से निर्माण करना या कब्जा करना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब कोर्ट ने पाया कि जमीन की पैमाइश का आदेश, जो कि कॉलेज की जमीन की हदों को तय करने के लिए बहुत जरूरी था, उसका पालन नहीं हुआ। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर पैमाइश के आदेश का पालन नहीं हुआ तो डीएम को न सिर्फ इसका कारण बताना होगा, बल्कि उन पर कोर्ट की अवमानना का केस भी चलाया जा सकता है। कोर्ट का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है और किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं करेगी।
यह पूरा मामला सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। ला मार्टिनियर कॉलेज जैसे ऐतिहासिक संस्थान की जमीन पर बिना उचित प्रक्रिया के निर्माण की कोशिशें चिंता का विषय हैं। कोर्ट का यह आदेश भविष्य में ऐसे मामलों में सरकारी एजेंसियों को अधिक सतर्क रहने का संकेत देता है।