Kashis Kotwal Baba Kalbhairavs Annual Shringar Mahotsav Maha Aarti With 125 Lakh Diyas Decorated With 50 Quintal Flowers
काशी के कोतवाल की महाआरती
नवभारत टाइम्स•
वाराणसी में बाबा कालभैरव का वार्षिक शृंगार महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर को पचास क्विंटल फूलों से सजाया गया। बाबा का दूल्हे की तरह शृंगार किया गया। छप्पन भोग लगाए गए और सवा लाख बत्तियों से महाआरती हुई। भजन संध्या और भंडारे का भी आयोजन हुआ। करीब दो लाख लोगों ने बाबा के दर्शन किए।
वाराणसी में सोमवार को काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का वार्षिक शृंगार महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस खास मौके पर बाबा को दूल्हे की तरह सजाया गया और मंदिर को 50 क्विंटल फूलों से महकाया गया। भक्तों ने बाबा को छप्पन भोग लगाया और सवा लाख बत्तियों से महाआरती की गई। इस आयोजन में भजन संध्या और भंडारे का भी इंतजाम था, जिससे पूरा मंदिर परिसर बाबा के जयकारों से गूंज उठा। सुबह से देर रात तक दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं और करीब दो लाख लोगों ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई।
यह वार्षिक शृंगार महोत्सव बाबा कालभैरव के प्रति भक्तों की गहरी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। इस दिन मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है, जिसमें 50 क्विंटल ताज़े फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। बाबा कालभैरव का शृंगार दूल्हे के रूप में किया जाता है, जो भक्तों के लिए एक अत्यंत मनमोहक दृश्य होता है।महोत्सव के दौरान, बाबा को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। यह एक पारंपरिक अनुष्ठान है जो बाबा के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए किया जाता है। इसके बाद, सवा लाख बत्तियों से महाआरती का आयोजन होता है, जो एक भव्य और अलौकिक अनुभव प्रदान करता है।
इस अवसर पर, भक्तों के मनोरंजन और आध्यात्मिक शांति के लिए भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। साथ ही, एक विशाल भंडारे का भी इंतजाम था, जहाँ सभी भक्तों को प्रसाद बांटा गया। इन सब आयोजनों के कारण, मंदिर परिसर में सुबह से लेकर रात तक भक्तों की भीड़ लगी रही।
बाबा कालभैरव के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। अनुमान है कि करीब दो लाख लोगों ने इस शुभ अवसर पर बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। यह महोत्सव बाबा कालभैरव के प्रति वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।