केजीएमयू : पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स में बढ़ेंगे बेड

नवभारत टाइम्स

केजीएमयू के पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स विभाग में बच्चों के लिए बेड की कमी जल्द दूर होगी। ट्रॉमा सेंटर के सामने नए भवन में विभाग की इमरजेंसी शिफ्ट होगी। यहां बेड की संख्या 12 से बढ़कर 20 हो जाएगी। विभाग को अपना ऑपरेशन थिएटर भी मिलेगा। इससे बच्चों के ऑपरेशन का इंतजार कम होगा और 24 घंटे सुविधा मिलेगी।

kgmu to increase pediatric orthopedics beds for children speeding up treatment
केजीएमयू के पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स विभाग में बच्चों के इलाज के लिए जल्द ही बेड की कमी दूर होगी। ट्रॉमा सेंटर के सामने पीआरए भवन में विभाग की नई इमरजेंसी शिफ्ट होगी, जिससे बेड की संख्या 12 से बढ़कर 20 हो जाएगी। साथ ही, विभाग को अपना ऑपरेशन थिएटर भी मिलेगा, जिससे बच्चों के ऑपरेशन का इंतजार कम होगा और हर दिन 5 से 7 ऑपरेशन हो सकेंगे। यह बदलाव प्रदेश भर से आने वाले हड्डी की बीमारियों और चोटों से पीड़ित बच्चों को समय पर बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

अभी पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स विभाग की इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर में ही चल रही है, जहां सिर्फ 12 बेड हैं। लेकिन, पूरे प्रदेश से बड़ी संख्या में बच्चे हड्डी की समस्याओं और चोटों के कारण यहां इलाज के लिए आते हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते बेड कम पड़ जाते हैं, जिससे इलाज मिलने में देरी होती है। यह स्थिति बच्चों के लिए काफी चिंताजनक है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि विभाग के पास अपना ऑपरेशन थिएटर भी नहीं है। बच्चों के ऑपरेशन हड्डी रोग विभाग में ही किए जाते हैं। इस वजह से रोजाना सिर्फ दो से तीन बच्चों के ही ऑपरेशन हो पाते हैं। बाकी कई बच्चों को ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जो उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है।

नई व्यवस्था के तहत, ट्रॉमा सेंटर के सामने बन रहे पीआरए भवन में पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स विभाग के लिए एक पूरा फ्लोर दिया जाएगा। यहां बेड की संख्या 12 से बढ़ाकर 20 कर दी जाएगी। इससे ज्यादा बच्चों को एक साथ भर्ती किया जा सकेगा। इसके अलावा, विभाग को अपना अलग ऑपरेशन थिएटर भी मिलेगा। यह ऑपरेशन थिएटर 24 घंटे चालू रहेगा, जिससे बच्चों के ऑपरेशन में लगने वाला इंतजार खत्म हो जाएगा।

इस नई सुविधा के शुरू होने के बाद, हर दिन 5 से 7 बच्चों के ऑपरेशन किए जा सकेंगे। इससे न केवल ऑपरेशन का इंतजार कम होगा, बल्कि बच्चों को समय पर इलाज भी मिल पाएगा। यह केजीएमयू के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, जो बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह कदम उन हजारों परिवारों के लिए राहत लेकर आएगा जो अपने बच्चों के इलाज के लिए परेशान हैं।