On Sheetla Saptami Devotees Offered Stale Sweet Rice And Took Blessings Of Mother Sheetla Mundan Sanskar Also A Major Attraction
बासी मीठे चावल चढ़ा मां शीतला का लिया आशीष
नवभारत टाइम्स•
गुड़गांव के श्री शीतला माता मंदिर में शीतला सप्तमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। भक्तों ने मां को बासी मीठे चावल और अन्य पकवान चढ़ाकर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर मंदिर में बच्चों के मुंडन संस्कार भी हुए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने विशेष व्यवस्थाएं की थीं।
गुड़गांव के श्री शीतला माता मंदिर में शीतला सप्तमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा, वहीं मेले में भी रौनक बनी रही। इस अवसर पर बच्चों के मुंडन संस्कार भी कराए गए, जो इस मेले की एक खास परंपरा है।
शीतला सप्तमी के पावन अवसर पर गुड़गांव का प्रसिद्ध श्री शीतला माता मंदिर आस्था के सैलाब में डूब गया। हजारों की संख्या में भक्तजन मां शीतला के दर्शन करने पहुंचे और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह से ही मंदिर में भक्तों का आना शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा। लोगों ने मां को नारियल, चुनरी और तरह-तरह के प्रसाद चढ़ाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना की। शाम को आरती के समय तो मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भर गया था।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला सप्तमी के दिन मां शीतला को बासी मीठे चावल , हलवा, पूड़ी और अन्य मीठे पकवानों का भोग लगाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि विधि-विधान से मां की पूजा करने से परिवार को हर तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस बार भी भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ मां की पूजा-अर्चना की और अपने परिवार के लिए मंगल कामना की।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन मिल सकें, इसके लिए स्वयंसेवकों (वॉलंटियर्स) की भी तैनाती की गई थी।
इस मेले की एक खास परंपरा बच्चों के मुंडन संस्कार की भी है। मंदिर परिसर में बने तालाब के पास इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। चैत्र मेले के दौरान बच्चों का मुंडन कराना और नवविवाहित जोड़ों की जात लगाना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में मुंडन कराने से बच्चे को देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और उसका जीवन खुशियों से भर जाता है। मुंडन संस्कार के लिए पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा-पाठ कराया जाता है, जिसके बाद परिवार के लोग मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।