मदद का वादा

नवभारत टाइम्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी में फंसे भारतीयों को मदद का भरोसा दिया है। युद्ध के कारण ऊर्जा संकट गहरा रहा है, इसलिए आत्मनिर्भरता जरूरी है। सरकार तेल-गैस की कमी से इनकार कर रही है, लेकिन होटलों में रसोई गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। सरकार ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और रूस से कच्चा तेल खरीदने के निर्देश दिए हैं।

promise of help for indians stranded in the gulf important step towards indias self reliance on energy crisis
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीयों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगी। युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया। इस तरह, सरकार ने मौजूदा संकट में लोगों का विश्वास जीतने और भविष्य के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है।

सरकार का कहना है कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है। हालांकि, रसोई गैस को लेकर लोगों में चिंता जरूर फैल गई है। दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में होटल और रेस्तरां ने गैस सप्लाई में रुकावट की शिकायत की है। कई जगहों पर कमर्शल LPG की सप्लाई रुक गई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरों में गैस की आपूर्ति पहले की तरह ही जारी है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
यह समय एक परीक्षा की घड़ी है। सरकार ने LPG उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी का निर्देश दिया है। साथ ही, रूस से 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा गया है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण, तेल को दूसरे रास्तों से मंगवाया जा रहा है। तेल और गैस की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए ये सभी कदम उठाए जा रहे हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि युद्ध जिस स्तर पर फैल चुका है, उसका असर किसी न किसी रूप में जरूर पड़ेगा। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी जरूरत का अधिकांश पेट्रोलियम आयात करते हैं, यह एक बड़ी चुनौती है।

संकट के मौके हमें सबक भी सिखाते हैं। भारत के लिए इस संकट से क्या सबक मिलता है? प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता की बात कही है। भारत की जरूरत और घरेलू उत्पादन को देखते हुए तेल और गैस के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर होना मुश्किल हो सकता है। लेकिन, आयात पर अत्यधिक निर्भरता को निश्चित रूप से कम किया जा सकता है। सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को तेजी से बढ़ावा देने का यह सही समय है। इलेक्ट्रिक वाहनों को भी प्रोत्साहित करना होगा। इससे पेट्रोल और डीजल पर होने वाला खर्च तो कम होगा ही, पर्यावरण में भी सुधार होगा।

एक और महत्वपूर्ण कदम है स्ट्रैटिजिक ऑयल रिजर्व (Strategic Oil Reserve) को बढ़ाना। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में बताया था कि भारत का पेट्रोलियम रिजर्व 74 दिनों की जरूरत को पूरा कर सकता है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency) के अनुसार, 90 दिनों का रिजर्व होना चाहिए। यह मामला देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सुरक्षा से भी जुड़ा है। पश्चिम एशिया का इतिहास अस्थिरता से भरा रहा है। भारत को स्थिरता के लिए अपने रास्ते खुद बनाने होंगे।

सरकार ने खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "सरकार खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीयों तक हरसंभव सहायता पहुंचाएगी, उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि युद्ध की वजह से ऊर्जा संकट पैदा हुआ है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता की जरूरत पर बल दिया। उनका कहना है कि इस तरह से मौजूदा संकट में सरकार ने लोगों में भरोसा जताने और भविष्य की तैयारी का संदेश दिया है। यह दर्शाता है कि सरकार न केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना कर रही है, बल्कि भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए भी देश को तैयार कर रही है।

हालांकि सरकार का कहना है कि देश में तेल-गैस की कमी नहीं है, लेकिन रसोई गैस को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में होटल और रेस्तरां ने गैस सप्लाई में रुकावट की शिकायत की है। कमर्शल LPG की सप्लाई कई जगहों पर रुक गई है। यह स्थिति आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि घरों में गैस आपूर्ति सामान्य है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

सरकार इस संकट से निपटने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। LPG उत्पादन को 25% बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, रूस से 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा गया है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण, तेल को वैकल्पिक रास्तों से मंगवाया जा रहा है। ये सभी उपाय तेल और गैस की आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए किए जा रहे हैं। लेकिन, यह भी समझना होगा कि युद्ध का असर व्यापक है और भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं, इस परीक्षा की घड़ी से गुजर रहे हैं।

संकट के समय अक्सर नए अवसर लेकर आते हैं। भारत के लिए इस संकट से सबसे बड़ा सबक आत्मनिर्भरता है। तेल और गैस के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर होना भले ही मुश्किल हो, लेकिन आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा को तेजी से बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से न केवल पेट्रोल-डीजल का खर्च कम होगा, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा होगा।

इसके अलावा, स्ट्रैटिजिक ऑयल रिजर्व को बढ़ाना भी एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में भारत का पेट्रोलियम रिजर्व 74 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय मानक 90 दिन का है। यह न केवल अर्थव्यवस्था के लिए, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया की अस्थिरता को देखते हुए, भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।