Vote For The One Who Stands With The Cow Avimukteshwaranand Announces Religious War
जनता को समझाएंगे जो गाय के साथ उसको करें वोट: अवमुक्तेश्वरानंद
नवभारत टाइम्स•
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गाय की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध शुरू किया है। वे जनता से अपील कर रहे हैं कि गाय के साथ खड़े होने वाले उम्मीदवार को ही वोट दें। उन्होंने कहा कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को समझाएंगे। इसके बाद ज्ञान यज्ञ और गविष्ठि परिक्रमा यात्रा भी आयोजित की जाएगी।
लखनऊ: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गायों की रक्षा के लिए एक बड़े धर्मयुद्ध का ऐलान किया है। उन्होंने साधु-संतों और अनुयायियों के साथ जनता के बीच जाकर लोगों से अपील की है कि वे गाय के साथ खड़े होने वाले उम्मीदवार को ही वोट दें। यह घोषणा उन्होंने लखनऊ के कांशीराम जी स्मृति उपवन में 40 दिन की गो प्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध यात्रा के समापन पर की। इस धर्मयुद्ध के तहत अब 52 दिन तक ज्ञान यज्ञ चलेगा, जिसके बाद 81 दिन की गविष्ठि परिक्रमा यात्रा शुरू होगी।
शंकराचार्य ने सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार गोसंरक्षण के लिए बड़ा बजट पेश कर रही है और टीवी पर इसका प्रचार भी करवा रही है। सरकार के बयान हैं कि उनके रहते गाय को कोई खरोंच भी नहीं लगा सकता, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उनका काम राजनीति करना नहीं है, बल्कि राजा को गलत दिशा में जाने पर सही रास्ते पर लाना है। उन्होंने कहा कि राजा पर नकेल कसने के लिए ही हिंदू समाज ने संतों को पाला है।इस धर्मयुद्ध के अगले चरण में 52 दिन का ज्ञान यज्ञ होगा। शंकराचार्य ने बताया कि जैसे गीता में कृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान दिया था, उसी तरह वे गांव-गांव जाकर लोगों को समझाएंगे। इसके बाद 81 दिन की गविष्ठि परिक्रमा यात्रा शुरू होगी। यह यात्रा 3 मई से गोरखपुर से शुरू होकर 23 जुलाई को गोरखपुर में ही समाप्त होगी। 24 जुलाई को सभी लोग फिर से इसी स्मृति उपवन में इकट्ठा होंगे।
शंकराचार्य ने अपनी एक 'चतुरंगिणी' सेना बनाने का भी ऐलान किया है। इस सेना के चार अंग होंगे: संन्यासी, वैरागी, उदासीन और बाकी बचे लोग चौथे हिस्से में रहेंगे। इस सेना में शामिल होने वाले हर व्यक्ति का पुलिस वेरिफिकेशन होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे कोई गलत काम न करें। शंकराचार्य ने कहा कि उनकी नजर में जो सही है और उस पर संकट आएगा, तो यह सेना उसकी लड़ाई लड़ेगी।
इस कार्यक्रम में कई नेता भी पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, पूर्व एमएलसी दीपक सिंह, अंशू अवस्थी, सपा नेता रविदास मेहरोत्रा, पूजा शुक्ला सहित कई नेता शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने आए थे। हालांकि, सभा के दौरान इन सभी नेताओं को मंच के सामने नीचे बैठने का आग्रह किया गया।
यात्रा के समापन के लिए स्मृति उपवन में एक सभा आयोजित की गई थी। उम्मीद थी कि यहां भारी भीड़ जुटेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जितना बड़ा पांडाल बनाया गया था, उतनी भी भीड़ नजर नहीं आई। अतिरिक्त कुर्सियां पांडाल के बाहर रखी थीं, लेकिन पांडाल में लगी कुर्सियां भी खाली रह गईं।
शंकराचार्य ने कहा कि वे साधु-संतों और अनुयायियों के साथ जनता के बीच जाएंगे। वे लोगों को समझाएंगे कि जो गाय के साथ खड़ा है, उसको वोट दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे राजनीति नहीं करेंगे और किसी पार्टी के लिए नहीं कहेंगे। वे गांव-गांव जाकर तथ्यों के साथ सच बताएंगे। उनका कहना था कि जो हमारी माई का है, वह हमारा भाई है।
यह धर्मयुद्ध गायों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। शंकराचार्य का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और उन्हें गायों के संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। वे चाहते हैं कि लोग अपने वोट का इस्तेमाल गायों के हित में करें। यह यात्रा और ज्ञान यज्ञ लोगों को गायों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में शिक्षित करेंगे।
शंकराचार्य ने सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारें अक्सर गायों के संरक्षण के वादे करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ खास नहीं होता। वे चाहते हैं कि सरकारें सिर्फ बयानबाजी न करें, बल्कि ठोस कदम उठाएं। उनकी 'चतुरंगिणी' सेना इसी दिशा में काम करेगी।
यह पूरा अभियान गायों के प्रति लोगों की भावनाओं को जगाने और उन्हें कार्रवाई के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है। शंकराचार्य का मानना है कि गाय भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है और उसकी रक्षा करना हर किसी का कर्तव्य है।