उड़ने वाली ‘टैक्सी’

Contributed byदिलीप लाल|नवभारत टाइम्स

परिवहन का भविष्य उड़ने वाली टैक्सी में है। चीन में 10 यात्रियों वाली इलेक्ट्रिक फ्लाइंग टैक्सी का सफल परीक्षण हुआ है। यह टैक्सी वर्टिकल टेकऑफ करती है और इसे चलाने के लिए लंबे रनवे की जरूरत नहीं होती। भारत में भी स्वदेशी एयर टैक्सी सेवा जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

flying taxi future of urban transport successful test in china soon to start in india
भविष्य की शहरी यात्रा का नया चेहरा, फ्लाइंग टैक्सी , अब हकीकत बनने लगी है। चीन ने हाल ही में 10 यात्रियों को ले जाने वाली इलेक्ट्रिक फ्लाइंग टैक्सी का सफल परीक्षण किया है। यह टैक्सी, जिसका नाम V5000 मॉडल है, 5 टन तक का सामान भी ढो सकती है। यात्रियों के लिए इसे 'स्काई ड्रैगन' और माल ढोने वाली टैक्सी को 'मैट्रिक्स' नाम दिया गया है। यह हेलिकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उड़ सकती है और नीचे उतर सकती है, जिसे वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (VTOL) कहते हैं। इसके लिए बड़े रनवे की जरूरत नहीं पड़ती। इन्हें इमारतों की छतों या छोटे हेलिपैड से भी उड़ाया जा सकता है। इसका हाइब्रिड मॉडल 1500 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है।

दुनिया भर के कई देश इस नई तकनीक पर तेजी से काम कर रहे हैं। चीन, अमेरिका और यूरोप में इस दिशा में खूब रिसर्च और टेस्ट चल रहे हैं। भारत में भी इस क्षेत्र में शुरुआती काम शुरू हो गया है। उम्मीद है कि भारत में जल्द ही अपनी पहली एयर टैक्सी सेवा शुरू हो जाएगी। IIT मद्रास की मदद से एक कंपनी ने एक खास e-VTOL विमान बनाया है। इसे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में दिखाया गया था। साल 2027 तक पहली एयर एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की योजना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में फ्लाइंग टैक्सी शहरों में सफर करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगी। यह तकनीक ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने में भी मदद कर सकती है। कल्पना कीजिए, आप अपनी छत से सीधे अपनी मंजिल तक उड़कर पहुंच रहे हैं, बिना किसी ट्रैफिक के। यह सब संभव होने वाला है।

फ्लाइंग टैक्सी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (VTOL) कर सकती है। इसका मतलब है कि इसे उड़ने और उतरने के लिए लंबे रनवे की जरूरत नहीं होती। यह हेलिकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उठती है और नीचे आती है। इसलिए, इन्हें इमारतों की छतों या छोटे हेलिपैड जैसी जगहों से भी ऑपरेट किया जा सकता है। यह शहरी इलाकों के लिए बहुत सुविधाजनक है, जहां जमीन की कमी होती है।

यह तकनीक न केवल यात्रियों के लिए बल्कि सामान ढोने के लिए भी बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। माल ढुलाई वाली टैक्सी, जिसे 'मैट्रिक्स' नाम दिया गया है, 5 टन तक का वजन ले जा सकती है। यह लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को भी तेज और कुशल बना सकती है। हाइब्रिड मॉडल की 1500 किलोमीटर की रेंज इसे लंबी दूरी की यात्राओं के लिए भी उपयुक्त बनाती है।

भारत में भी इस क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। IIT मद्रास के सहयोग से विकसित किया गया e-VTOL विमान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 2027 तक एयर एम्बुलेंस सेवा शुरू होने से दूरदराज के इलाकों में भी तुरंत चिकित्सा सहायता पहुंचाना आसान हो जाएगा। यह तकनीक जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। कुल मिलाकर, फ्लाइंग टैक्सी शहरी परिवहन के भविष्य को उज्ज्वल बना रही है।