27 फरवरी से...

नवभारत टाइम्स

27 फरवरी से सेंसेक्स में 6,723.27 अंक की गिरावट आई है। यह गिरावट 8.27 प्रतिशत रही। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण शेयर बाज़ार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। निवेशकों में चिंता का माहौल है। बाज़ार में गिरावट का यह दौर जारी रह सकता है।

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण शेयर बाज़ार में भारी गिरावट आई है। सेंसेक्स 6,723.27 अंक यानी 8.27% तक गिर गया है। इस घटना ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

यह गिरावट सीधे तौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा है। इस तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर डाला है। शेयर बाज़ार इस तरह की अनिश्चितताओं के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। जब भी कहीं बड़ी अशांति फैलती है, तो निवेशक अपना पैसा सुरक्षित जगहों पर ले जाने की कोशिश करते हैं। इससे शेयर बाज़ार में बिकवाली बढ़ जाती है और कीमतें गिरने लगती हैं।
सेंसेक्स, जो भारत के 30 बड़ी कंपनियों के शेयरों का सूचकांक है, इस गिरावट का एक प्रमुख पैमाना है। इसका 8.27% गिरना यह दर्शाता है कि बाज़ार में कितनी बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। यह सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि लाखों निवेशकों की कमाई में आई कमी का संकेत है।

इस स्थिति में, निवेशक अक्सर घबरा जाते हैं। वे अपने शेयर बेचकर अपना पैसा निकालने की कोशिश करते हैं। इससे बाज़ार में और अधिक बिकवाली होती है और कीमतें और नीचे चली जाती हैं। यह एक तरह का चक्र बन जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक शेयर बाज़ार में अनिश्चितता बनी रह सकती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे घबराएं नहीं और सोच-समझकर फैसले लें।