Dont Worship Dhanalakshmi Worship Ashtalakshmi Understand The Deeper Meaning Of Prosperity
धनलक्ष्मी नहीं, अष्टलक्ष्मी की करें पूजा
Contributed by: सुरक्षित गोस्वामी|नवभारतटाइम्स.कॉम•
दीपावली की लक्ष्मी पूजा करते समय हम अपने सामने रुपये-पैसे, सोने-चांदी के सिक्के और आभूषण रख लेते हैं। फिर प्रार्थना करते हैं कि घर में धन बढ़े, व्यापार में लाभ हो और जीवन में समृद्धि आए। लेकिन, क्या लक्ष्मी का अर्थ केवल धन है?
भारतीय परंपरा में लक्ष्मी के आठ स्वरूपों यानी अष्टलक्ष्मी का वर्णन है। ये हैं- आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी और विद्यालक्ष्मी। ये बताते हैं कि समृद्धि केवल धन इकट्ठा कर लेने का नाम नहीं है। इस दृष्टि से देखें तो लक्ष्मी पूजन का अर्थ केवल नोटों और आभूषणों की पूजा करना नहीं, लक्ष्मी के इन सभी रूपों के प्रति कृतज्ञ होना है।अद्वैत वेदांत याद दिलाता है कि बाहरी उपलब्धियां हमारे अस्तित्व का अंतिम सत्य नहीं हैं। धन आवश्यक है, लेकिन उससे अहंकार बढ़े और संतोष समाप्त हो जाए, तो वह समृद्धि अधूरी है। ज्ञान हो लेकिन विनम्रता न हो, तो जीवन असंतुलित हो जाएगा। इस दीपावली हम लक्ष्मी के आठों स्वरूपों की पूजा करें। धन के साथ ज्ञान, अन्न के साथ सेवा, शक्ति के साथ करुणा और सफलता के साथ विनम्रता की प्रार्थना करें।