दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा: एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों की रीपैकेजिंग कर बेचने वाला रैकेट पकड़ा, 20 लाख से अधिक की वस्तुएं जब्त

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नई दिल्ली, 3 जुलाई: दिल्ली पुलिस ने एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है जो एक्सपायर्ड हो चुके अंतरराष्ट्रीय ब्रांडेड खाद्य उत्पादों की रीपैकेजिंग और उनकी एक्सपायरी डेट में हेराफेरी करके उन्हें बाजार में बेचने का काम कर रहा था। इस मामले में 20 लाख रुपये से ज्यादा की कीमती वस्तुएं जब्त की गई हैं और सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह रैकेट एक्सपायर्ड उत्पादों को भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचने की फिराक में था।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बाल श्रम का इस्तेमाल कर कुछ लोग अवैध काम कर रहे हैं। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो उन्हें कोई नाबालिग या बाल मजदूर काम करते नहीं मिले। हालांकि, जांच के दौरान एक बड़े संगठित रैकेट का खुलासा हुआ जो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट बदलकर उन्हें बाजार में बेच रहा था।
इस रैकेट के आरोपी अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के एक्सपायर्ड हो चुके खाद्य उत्पादों को बहुत सस्ते दामों पर खरीदते थे। इसके बाद, वे इन उत्पादों की एक्सपायरी डेट और पोषण संबंधी जानकारी वाले स्टिकर को बदलकर उन्हें बिल्कुल नए उत्पादों के रूप में पेश करते थे। पुलिस ने इस मामले में थम्स अप, फैंटा, बोर्नविटा, हॉर्लिक्स, घी, मैगी नूडल्स, 2-लीटर कोल्ड ड्रिंक पैक, कोल्ड ड्रिंक के डिब्बे और पेपर बोट जैसे कई उत्पाद बरामद किए हैं।

जांच में पता चला कि यह गोरखधंधा वेस्टेन कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से चल रहा था। कंपनी के मालिक की पहचान दर्शन सिंह सचदेवा के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, कंपनी का मालिक और उसके साथी बेहद कम कीमत पर एक्सपायर्ड हो चुके अंतरराष्ट्रीय खाद्य उत्पाद खरीदते थे। इनमें से ज्यादातर उत्पाद अपनी एक्सपायरी डेट पार कर चुके होते थे।

आरोपी इन उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट को बदलकर, लेबल और उत्पाद की जानकारी को बदलकर, नकली बारकोड, बैच नंबर और एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) चिपकाकर और फिर उन्हें ताज़ा दिखने वाले रैपर में दोबारा पैक करके अवैध रूप से बेचते थे। इस तरह वे ग्राहकों को धोखा देकर मुनाफा कमा रहे थे।

इस रैकेट में शामिल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम दर्शन सिंह सचदेवा, नितेश भारद्वाज, नरेंद्र कुमार, कपिल, लकी ओझा, प्रेम यादव और पवन कुमार यादव हैं। पुलिस इस मामले की आगे की जांच कर रही है ताकि इस रैकेट के और भी तार जोड़े जा सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे उत्पाद किसी भी ग्राहक तक न पहुंचें।

यह मामला खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर उदाहरण है। पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है, जिसने एक बड़े धोखे को उजागर किया है। ग्राहकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी उत्पाद को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट और अन्य जानकारी की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। ऑनलाइन शॉपिंग करते समय भी विश्वसनीय प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

पुलिस ने बताया कि बरामद की गई वस्तुओं का कुल मूल्य 20 लाख रुपये से अधिक है। यह रैकेट न केवल स्थानीय बाजार में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने जाल फैला रहा था। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन एक्सपायर्ड उत्पादों को बेचना एक चिंता का विषय है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो सकते हैं।

इस तरह के रैकेट समाज के लिए एक बड़ा खतरा हैं। ये न केवल लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, बल्कि बाजार में नकली उत्पादों को बढ़ावा देकर ईमानदार व्यापारियों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी बेहद चालाकी से काम कर रहे थे और उन्होंने अपने अपराध को छिपाने के लिए कई तरीके अपनाए थे। नकली बारकोड और बैच नंबर का इस्तेमाल यह साबित करता है कि वे कितने सुनियोजित तरीके से काम कर रहे थे।

यह घटना इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियमों और उनकी प्रभावी निगरानी की कितनी आवश्यकता है। ग्राहकों को भी जागरूक रहने और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने की सलाह दी जाती है।

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