भारत का सर्विसेज पीएमआई जून में 57.4 पर, 17 महीनों में सबसे कम, जानिए क्या है वजह
भारत का सर्विसेज पीएमआई जून में 57.4 पर, 17 महीनों में सबसे कम, जानिए क्या है वजह
NewsPoint•
मुंबई, 3 जुलाई: भारत में जून महीने में सर्विसेज सेक्टर की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जून में 57.4 रहा, जो मई के 59.8 से कम है। यह गिरावट बाजार की मुश्किलों और कुछ सर्विसेज में ग्राहकों की घटती दिलचस्पी के कारण हुई है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि नए निर्यात ऑर्डर में पिछले तीन महीनों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई डेटा के अनुसार, सर्विसेज आउटपुट की ग्रोथ मई की तुलना में जून में धीमी रही। यही वजह है कि सर्विसेज पीएमआई में कमी आई। लेकिन, निर्यात के मामले में अच्छी बात यह है कि जून में नए निर्यात ऑर्डर में बीते तीन महीनों में सबसे तेज वृद्धि हुई है। इसका एक कारण लागत का दबाव कम होना भी बताया जा रहा है।एचएसबीसी में मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने बताया कि भारत का सर्विस पीएमआई अभी भी विस्तार वाले दायरे में है, यानी आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। लेकिन, जून में यह 57.4 पर आ गया, जो पिछले 17 महीनों में सबसे कम है। उन्होंने कहा कि इस गति में आई कमी बाजार की मुश्किलों और खासकर घरेलू मांग के कमजोर होने का संकेत देती है। इसके बावजूद, विदेशी मांग मजबूत बनी रही। विदेशों में बिक्री अच्छी रही और ग्रोथ तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
एसएंडपी ग्लोबल द्वारा तैयार किए गए एचएसबीसी पीएमआई डेटा में यह भी सामने आया कि जिन सर्विस कंपनियों ने ग्रोथ दिखाई, उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रतिस्पर्धी कीमतों का फायदा उठाया। ई-कॉमर्स की बढ़ती मांग, ग्राहकों की ज्यादा बुकिंग और बेहतर लोकल टूरिज्म ने भी मदद की। वहीं, कई कंपनियों ने यह भी कहा कि बाजार के हालात मुश्किल होने और उनकी सर्विस में ग्राहकों की कम दिलचस्पी के कारण बिक्री पर असर पड़ा।
जून में कंपोजिट पीएमआई, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों सेक्टर शामिल हैं, 57.1 रहा। यह मई के 59.3 से कम है। भंडारी ने कहा कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से इनपुट कॉस्ट (सामान खरीदने की लागत) और आउटपुट चार्ज (सामान बेचने की कीमत) में महंगाई कम हुई है। इससे कीमतों का दबाव भी घटा है।
व्यापक सुस्ती के चलते भारत का कंपोजिट पीएमआई मई के 59.3 से घटकर जून में 57.1 हो गया। इसके साथ ही, बिक्री की मात्रा में कमी आई, नौकरियों के सृजन की रफ्तार धीमी हुई और कीमतों में भी कम तेजी देखी गई।
पीएमआई का 50 से ऊपर होना यह बताता है कि आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। अगर यह 50 से नीचे चला जाता है, तो इसका मतलब है कि आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आ रही है। जून में सर्विसेज पीएमआई 57.4 पर रहा, जो 50 से काफी ऊपर है, इसलिए यह अच्छी बात है कि सर्विसेज सेक्टर में अभी भी बढ़ोतरी हो रही है, भले ही रफ्तार थोड़ी कम हुई हो।
कंपनियों ने बताया कि उन्होंने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपनी कीमतों को प्रतिस्पर्धी रखा। यानी, उन्होंने अपने सामान या सर्विस की कीमत ऐसी रखी जिससे ग्राहक आसानी से खरीद सकें। ई-कॉमर्स का मतलब है ऑनलाइन सामान खरीदना और बेचना। इसकी मांग बढ़ने से भी सर्विसेज सेक्टर को फायदा हुआ। लोकल टूरिज्म का मतलब है अपने ही देश में घूमना-फिरना। जब लोग अपने देश में ज्यादा घूमने लगे, तो इससे होटल, ट्रांसपोर्ट और अन्य सर्विसेज को बढ़ावा मिला।
हालांकि, कुछ कंपनियों को मुश्किल बाजार हालात का सामना करना पड़ा। इसका मतलब है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा ज्यादा थी या ग्राहकों के पास पैसे कम थे। कुछ सर्विसेज में ग्राहकों की दिलचस्पी कम होने का मतलब है कि लोग उन सर्विसेज का इस्तेमाल कम कर रहे थे। इससे कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ा।
कंपोजिट पीएमआई का कम होना यह दर्शाता है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों सेक्टरों की ग्रोथ में थोड़ी कमी आई है। लेकिन, यह अभी भी 50 से ऊपर है, जो एक सकारात्मक संकेत है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने से महंगाई पर लगाम लगी है, जिससे कंपनियों को थोड़ी राहत मिली है।