केजीएमयू में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध का सपा का विरोध, राम मंदिर चंदा विवाद पर भी उठाए सवाल
केजीएमयू में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध का सपा का विरोध, राम मंदिर चंदा विवाद पर भी उठाए सवाल
NewsPoint•
समाजवादी पार्टी (सपा) ने लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने इस कदम को "बिल्कुल गलत सोच" करार देते हुए कहा कि केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में ऐसे दकियानूसी फरमान जारी करना अनुचित है। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में कथित चंदा चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज न होने से देश की भावनाओं का अनादर हो रहा है। इसके अलावा, वर्मा ने अमेरिका-ईरान संघर्ष पर भारत से मजबूत मध्यस्थता की भूमिका निभाने की अपील की है।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में केजीएमयू में मांसाहारी भोजन पर लगे प्रतिबंध को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि देश के एपेक्स इंस्टीट्यूट में केजीएमसी और केजीएमयू आता है। जहां पर वर्ल्ड का सबसे अच्छा ब्रेन आता है और उस ब्रेन में इतना दकियानूसी सर्कुलर, मैं इसका विरोध करता हूं। समाजवादी पार्टी इसका विरोध करती है।" वर्मा ने इस प्रतिबंध को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि राज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों ने मेस की खराब हाइजीनिक कंडीशन का हवाला दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वहां मांसाहार या शाकाहार बनाना बंद कर दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नेतागिरी चमकाने वाले अफसर और केजीएमसी के कर्मचारी यह भूल गए हैं कि वहां सभी धर्मों के लोग आते हैं, जो शाकाहार और मांसाहार दोनों खाते हैं। उन्होंने मांसाहार को प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी बताया। वर्मा ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रतिबंध लगाने वाले खुद ही अपने फरमान का खंडन कर रहे हैं, क्योंकि वे मांसाहार बनाने से मना कर रहे हैं, लेकिन उसे बाहर से मंगवाने की इजाजत दे रहे हैं। उन्होंने इसे "बिल्कुल गलत सोच" बताते हुए समाजवादी पार्टी के विरोध को दोहराया।राम मंदिर के चढ़ावा विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि पहले 15 सदस्यीय राम जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन किया गया था, जिसमें अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन केंद्र सरकार ने उन 15 में से 12 लोगों को खुद ही मनोनीत कर दिया। उन्होंने कहा, "तो जब आप अपने हिसाब से पूरा का पूरा ये बना रहे हैं, उसके बावजूद ये काम होना खतरनाक है।" वर्मा ने इसे केवल दिखावा करार दिया और कहा कि सीईओ को मनोनीत करने से कोई मतलब नहीं है, जब तक कि चोर और चोरी की वजह का पता न चल जाए। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि डेढ़ महीने बाद भी चंदा चोरी जैसे बड़े सवाल अनुत्तरित हैं। उन्होंने कहा, "पूरा देश जान चुका है। उसके बावजूद भी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर तक नहीं हुई है।" वर्मा ने इसे देश की जनता की भावनाओं का अनादर बताया और कहा कि सरकार इसे बहुत हल्के में ले रही है।
इसी बीच, भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सपा प्रवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय लिया है और इस पर अभी विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक इस पर पूरी तरह से विचार न हो जाए, तब तक इस पर टिप्पणी करना ठीक नहीं है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए सपा प्रवक्ता ने कहा कि यह बहुत अफसोस की बात है कि एक अच्छे समझौते के बाद भी दोनों देशों के बीच फिर से लड़ाई शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि अब इसमें मध्यस्थता के लिए और लोगों को भी आगे आना चाहिए। वर्मा ने हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से मध्यपूर्व एशिया और पूरे साउथ ईस्ट एशिया पर पड़ने वाले प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर भारत की 140 करोड़ की आबादी पर पड़ता है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ये वो समय आ गया है जब भारत को इसमें मजबूत मध्यस्थता भी करनी चाहिए।" उन्होंने भारत सरकार के साथ विदेश नीति में खड़े रहने की बात कही और उम्मीद जताई कि यह संघर्ष जल्दी खत्म होगा और ऊर्जा संकट का समाधान होगा।