तिलोत्तमा शोम ने 'ढाई किलो का हाथ' डायलॉग पर क्या कहा? सनी देओल ने दिया था खास हौसला

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Navbharat Times
बॉलीवुड की 'दामिनी' फिल्म का वो डायलॉग 'ढाई किलो का हाथ' आज भी लोगों को याद है. ये डायलॉग सुनते ही सनी देओल का दमदार अंदाज़ सामने आ जाता है. जब किसी दूसरे एक्टर को ऐसा आइकॉनिक डायलॉग बोलने का मौका मिलता है, तो ये एक बड़ी चुनौती होती है. एक्ट्रेस तिलोत्तमा शोम ने अपनी नई फिल्म 'इक्का' में ये डायलॉग बोला है. उन्होंने बताया कि ये उनके लिए कैसा अनुभव रहा.

तिलोत्तमा शोम ने एक इंटरव्यू में बताया कि शुरुआत में उन्हें ये डायलॉग बोलने में थोड़ी झिझक हो रही थी. उन्होंने डायरेक्टर से कहा था कि ये डायलॉग तो सनी देओल को ही बोलना चाहिए. लेकिन सनी देओल ने उन्हें हौसला दिया और कहा कि वो इसे अपने तरीके से पेश करें. तिलोत्तमा ने कहा, "सच कहूं तो जब मैं सेट पर थी, तब मैं न तो बहुत नर्वस थी और न ही बहुत ज्यादा उत्साहित. मैं कहीं बीच की स्थिति में थी. मुझे पता था कि यह एक बहुत ही लोकप्रिय डायलॉग है. मैंने निर्देशक को यह समझाने की कोशिश भी की थी कि शायद सनी देओल को ही यह डायलॉग बोलना चाहिए लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुए."
इसके बाद तिलोत्तमा ने खुद सनी देओल से बात की. उन्होंने सनी देओल से पूछा कि क्या उन्हें कोई परेशानी होगी अगर कोई और एक्टर उनका ये मशहूर डायलॉग बोले. एक्ट्रेस ने बताया, ‘मैंने सनी देओल से पूछा कि क्या उन्हें कोई आपत्ति है कि मैं उनका इतना मशहूर डायलॉग बोलूं, तो इस पर उन्होंने कहा, ‘मुझे क्यों आपत्ति होगी? इस डायलॉग को अपने तरीके से कहो.’ जब मुझे सनी सर और बाकी लोगों से इतना समर्थन मिला, तो मैंने उस डायलॉग को अपना बना लिया. मैंने कभी उनकी नकल करने या उनसे आगे निकलने की कोशिश नहीं की. मेरे मन में ऐसा कोई विचार नहीं था.”

तिलोत्तमा ने सनी देओल के साथ काम करने के अपने अनुभव को भी साझा किया. उन्होंने बताया, ‘सनी देओल बहुत शांत इंसान हैं, और मैं भी कुछ ऐसी ही हूं. अक्सर लोग सोचते हैं कि कलाकार कैमरे के सामने आते हैं, इसलिए वे स्वभाव से बहुत ज्यादा बोलने वाले होंगे लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘मुझे सनी देओल की यह बात बहुत पसंद आई कि उनकी खामोशी भी सकारात्मक ऊर्जा देती है. कई बार किसी व्यक्ति की चुप्पी माहौल को असहज बना सकती है, लेकिन उनकी चुप्पी आसपास के लोगों को आराम महसूस कराती है. जब भी हमारी बातचीत हुई, वह हमेशा विनम्र, सम्मान देने वाले और बेहद सहयोगी रहे. वह सच में एक बेहतरीन व्यक्ति हैं.”

फिल्म 'इक्का' में तिलोत्तमा शोम ने मधुरा बनर्जी का किरदार निभाया है. वो एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हैं, यानी सरकारी वकील. फिल्म में उनका मुकाबला सनी देओल के किरदार अर्जुन मेहरा से होता है. सनी देओल एक डिफेंस लॉयर यानी बचाव पक्ष के वकील बने हैं. ये फिल्म कोर्टरूम ड्रामा पर आधारित है. इसमें दोनों किरदारों के बीच विचारों और तर्कों की ज़बरदस्त टक्कर देखने को मिलती है.

इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी 'इक्का' में सनी देओल और तिलोत्तमा शोम के अलावा अक्षय खन्ना और दिया मिर्जा भी अहम भूमिकाओं में हैं. ये थ्रिलर फिल्म 10 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई है.

'ढाई किलो का हाथ' डायलॉग को लेकर तिलोत्तमा शोम ने बताया कि जब उन्हें ये डायलॉग मिला तो वो थोड़ी घबराई हुई थीं. उन्हें लगा कि ये डायलॉग तो सनी देओल का सिग्नेचर डायलॉग है. उन्होंने डायरेक्टर से कहा कि ये डायलॉग सनी देओल ही बोलें तो बेहतर होगा. लेकिन डायरेक्टर नहीं माने. तब उन्होंने सनी देओल से बात की. सनी देओल ने उन्हें कहा कि वो इसे अपने अंदाज़ में बोलें. सनी देओल के इस प्रोत्साहन से तिलोत्तमा को हिम्मत मिली. उन्होंने कहा कि वो सनी देओल की नकल नहीं करना चाहती थीं. वो बस उस डायलॉग को अपने तरीके से बोलना चाहती थीं.

तिलोत्तमा शोम ने सनी देओल के शांत स्वभाव की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि सनी देओल बहुत कम बोलते हैं, लेकिन उनकी खामोशी में भी एक पॉजिटिव एनर्जी है. वो जब भी बात करते हैं तो बहुत विनम्र और मददगार होते हैं. तिलोत्तमा को सनी देओल का ये अंदाज़ बहुत पसंद आया. उन्होंने कहा कि सनी देओल एक बेहतरीन इंसान हैं.

फिल्म 'इक्का' की कहानी एक कोर्टरूम ड्रामा है. इसमें सनी देओल और तिलोत्तमा शोम वकील के रोल में हैं. दोनों के बीच कानूनी दांव-पेंच चलते हैं. ये फिल्म दर्शकों को काफी पसंद आ रही है. फिल्म में अक्षय खन्ना और दिया मिर्जा भी हैं. ये फिल्म नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है.

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