भारत ईयू टीटीसी की तीसरी बैठक ब्रुसेल्स में: व्यापार, तकनीक और सुरक्षा पर सहयोग मजबूत
भारत-ईयू टीटीसी की तीसरी बैठक ब्रुसेल्स में: व्यापार, तकनीक और सुरक्षा पर सहयोग मजबूत
NewsPoint•
ब्रसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की तीसरी बैठक बुधवार को हुई, जिसमें विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत की ओर से सह-अध्यक्षता की। यह बैठक अप्रैल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा शुरू की गई टीटीसी के तहत हुई, जिसका मकसद व्यापार, भरोसेमंद तकनीक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करना और सहयोग को मजबूत करना है। भारत और ईयू दुनिया के दो बड़े लोकतंत्र हैं, जिनकी अर्थव्यवस्थाएं खुली हैं, साझा मूल्य हैं और विविध समाज हैं, इसलिए वे बदलते वैश्विक माहौल में स्वाभाविक रणनीतिक साझेदार हैं। दोनों पक्षों ने 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन को याद किया, जहाँ उन्होंने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और ऊंचे स्तर तक ले जाने का वादा किया था।
बैठक में, भारत और ईयू ने रणनीतिक तकनीक, डिजिटल प्रशासन और डिजिटल कनेक्टिविटी पर काम कर रहे कार्य समूह-एक के तहत डिजिटल सहयोग को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि डिजिटल ट्रस्ट सेवाओं को एक-दूसरे के साथ बेहतर ढंग से काम करने योग्य बनाने के लिए तकनीकी स्तर पर काम जारी रहेगा। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग का ढांचा तैयार करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग से जुड़ी बेहतर प्रक्रियाओं को साझा करने, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) और क्वांटम तकनीक में सहयोग बढ़ाने, कुशल आईसीटी कर्मचारियों की आवाजाही को आसान बनाने और अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक व 6जी मानकों पर मिलकर काम तेज करने पर भी सहमति बनी। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया कि आज के समय में जब व्यापार और तकनीक तेजी से जुड़ रहे हैं, भारत और ईयू साझा मूल्यों और लक्ष्यों के आधार पर रचनात्मक बातचीत जारी रखे हुए हैं। दोनों पक्ष मानते हैं कि टीटीसी व्यापार, तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर बेहतर सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। इसका लक्ष्य वैश्विक स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देना और टिकाऊ, नए विचारों पर आधारित तथा सभी को साथ लेकर चलने वाली आर्थिक प्रगति को मजबूत करना है।एमईए के अनुसार, जनवरी 2026 में एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर और सील से जुड़े प्रशासनिक समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, भारत और ईयू ई-सिग्नेचर को एक-दूसरे की प्रणालियों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ने और आपसी मान्यता देने के लिए तकनीकी बातचीत जारी रखेंगे। दोनों पक्ष डिजिटल वॉलेट की आपसी संगतता, जिसमें बिजनेस वॉलेट भी शामिल हैं, पर बातचीत आगे बढ़ाएंगे। साथ ही, नागरिकों और संस्थाओं के लिए ईयू डिजिटल आइडेंटिटी वॉलेट और भारत के डिजिलॉकर को जोड़ने की एक पायलट परियोजना की संभावनाओं पर भी विचार करेंगे। यह काम दोनों पक्षों द्वारा तय किए गए उपयोग के मामलों (यूज केस) के आधार पर किया जाएगा।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत और यूरोपीय संघ ने माना कि दोनों के बीच सहयोग को बढ़ाने में डीप-टेक स्टार्टअप, इनोवेशन इकोसिस्टम और व्यवसायों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए, दोनों पक्षों ने टीटीसी के तहत एक विशेष मंच बनाने की संभावनाओं पर विचार करने का फैसला किया है, ताकि ‘ब्लू वैलीज’ पहल पर आगे चर्चा की जा सके। दोनों पक्षों ने 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान शुरू किए गए भारत-ईयू बिजनेस फोरम को हर साल आयोजित करने पर भी सहमति जताई है। इसके साथ ही, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अलग-अलग उद्योगों के साथ नियमित बैठकें और बातचीत भी की जाएंगी। यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत और ईयू दोनों ही एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं।
मंत्रालय के अनुसार, टीटीसी की अगली मंत्री स्तरीय बैठक 2027 में नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। यह बैठक भारत और ईयू के बीच बढ़ते सहयोग और साझेदारी का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी। इस बैठक में दोनों पक्ष उन मुद्दों पर चर्चा करेंगे जो उनके व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के भविष्य को आकार देंगे। यह दिखाता है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ दीर्घकालिक संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह सहयोग सिर्फ व्यापार और तकनीक तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा मूल्यों और एक बेहतर भविष्य के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। दोनों पक्ष मानते हैं कि मिलकर काम करने से वे वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में अधिक सक्षम होंगे और अपने नागरिकों के लिए समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएंगे। यह साझेदारी न केवल दोनों क्षेत्रों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस बैठक में डिजिटल पहचान, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी), क्वांटम तकनीक और 6जी जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर सहयोग की बात हुई। ये सभी क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्था और समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में मिलकर काम करने से भारत और ईयू दोनों को ही फायदा होगा और वे वैश्विक स्तर पर तकनीकी नवाचार में अग्रणी बन सकेंगे।
इसके अलावा, कुशल आईसीटी कर्मचारियों की आवाजाही को आसान बनाने पर भी सहमति बनी है। इसका मतलब है कि भारत और ईयू के बीच आईटी पेशेवरों का आना-जाना आसान होगा, जिससे दोनों क्षेत्रों में प्रतिभा का आदान-प्रदान बढ़ेगा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम दोनों क्षेत्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आईटी क्षेत्र आज की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह सहयोग 'ब्लू वैलीज' पहल पर भी केंद्रित होगा। यह पहल नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए है। दोनों पक्ष एक विशेष मंच बनाने पर विचार कर रहे हैं ताकि इस पहल पर आगे चर्चा की जा सके। यह दिखाता है कि दोनों पक्ष स्टार्टअप और नवाचार को कितना महत्व देते हैं और वे मिलकर कैसे एक मजबूत इकोसिस्टम बना सकते हैं।
भारत-ईयू बिजनेस फोरम को हर साल आयोजित करने पर भी सहमति हुई है। यह फोरम दोनों क्षेत्रों के व्यवसायों को एक साथ आने और व्यापार के अवसरों पर चर्चा करने का एक मंच प्रदान करेगा। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम भारत और ईयू के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
कुल मिलाकर, भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की यह बैठक दोनों पक्षों के बीच बढ़ते सहयोग और साझेदारी का एक स्पष्ट संकेत है। यह बैठक भविष्य में दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के क्षेत्र में और अधिक सहयोग की नींव रखेगी। यह दिखाता है कि भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं और वे कैसे एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। यह साझेदारी न केवल दोनों क्षेत्रों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।