दक्षिण कोरिया में पैरेंटल लीव का सच: सर्वे में खुलासा, आधे कर्मचारी नहीं ले पाते अवकाश

NewsPoint
Navbharat Times
दक्षिण कोरिया में पैरेंटल लीव का सच: सरकारी दावों की पोल खोलता सर्वे, आधे से ज्यादा कर्मचारी सुविधा से वंचित

सोल, 19 जुलाई। दक्षिण कोरिया से पिछले साल (2025) आई एक खबर ने देश को बड़ी राहत दी थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जन्म दर में वृद्धि देखी गई थी, जिसे सरकार ने अपनी नीतियों की सफलता बताया था। लेकिन 2026 में आए एक सर्वे ने इन दावों की हवा निकाल दी है। यह सर्वे बताता है कि दक्षिण कोरिया में कामकाजी लोगों के लिए पैरेंटल लीव (बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश) या कम काम के घंटे जैसी सुविधाओं का लाभ उठाना बिल्कुल भी आसान नहीं है। एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, देश के लगभग आधे से ज्यादा कर्मचारी, जिन्हें इन सुविधाओं की जरूरत है, वे भी इन्हें खुलकर इस्तेमाल नहीं कर पाते। यह सर्वे 1 जून से 9 जून के बीच 19 वर्ष या उससे अधिक आयु के 1,000 कार्यालय कर्मचारियों पर किया गया था। इसे गैपजिल 119 नामक एक नागरिक संगठन ने कराया, जो कार्यस्थलों पर शक्ति के दुरुपयोग को रोकने का काम करता है।
सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले हैं। इसमें 46.7 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर भी वे स्वतंत्र रूप से पैरेंटल लीव नहीं ले सकते। इसका मतलब है कि कानून तो हैं, लेकिन हकीकत में कई कर्मचारियों को इन सुविधाओं का फायदा उठाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब सरकार जन्म दर बढ़ाने के लिए पैरेंटल लीव जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने की बात कर रही है।

सर्वे में यह भी पता चला कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों की हालत स्थायी कर्मचारियों से कहीं ज्यादा खराब है। 62.3 प्रतिशत कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने कहा कि वे पैरेंटल लीव लेने के लिए स्वतंत्र महसूस नहीं करते। वहीं, स्थायी कर्मचारियों में यह आंकड़ा 36.3 प्रतिशत रहा। यह दिखाता है कि नौकरी की सुरक्षा का अभाव पैरेंटल लीव लेने में एक बड़ी बाधा है।

कंपनी के आकार का भी इस पर बड़ा असर देखने को मिला। जिन छोटी कंपनियों में पांच से कम कर्मचारी हैं, वहां 68 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें पैरेंटल लीव लेने में दिक्कतें आती हैं। इसके विपरीत, बड़ी कंपनियों, जिनमें 300 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं, वहां यह प्रतिशत घटकर 30.5 प्रतिशत रह गया। इससे साफ है कि छोटी कंपनियों में कर्मचारियों पर दबाव ज्यादा होता है।

सबसे चिंताजनक बात महिला कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए सामने आई। इस वर्ग की 70.2 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि वे स्वतंत्र रूप से पैरेंटल लीव का उपयोग नहीं कर पातीं। यह आंकड़ा महिलाओं पर काम और परिवार की दोहरी जिम्मेदारी के बोझ को और भी गहरा करता है।

सर्वे में यह भी पाया गया कि 41 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने कहा कि वे मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) का भी खुलकर उपयोग नहीं कर सकते। इसके विपरीत, पुरुष कर्मचारी और वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग, जो वैसे भी इन सुविधाओं का कम इस्तेमाल करते हैं, उन्होंने अपेक्षाकृत अधिक संख्या में कहा कि वे मैटरनिटी और पैरेंटल लीव दोनों का स्वतंत्र रूप से लाभ उठा सकते हैं। यह एक विरोधाभास है जो कार्यस्थल की संस्कृति पर सवाल उठाता है।

गैपजिल 119 संगठन का कहना है कि कार्यस्थल पर ये नीतियां काफी हद तक कंपनी के आकार, नौकरी की प्रकृति, वेतन और काम की अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि "ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है, जहां कर्मचारी बिना किसी दबाव या भेदभाव के मातृत्व और पैरेंटल लीव का उपयोग कर सकें।" यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मांग है जो एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए जरूरी है।

योनहाप न्यूज एजेंसी ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि अगर कर्मचारियों को परिवार और काम के बीच संतुलन बनाने के लिए पर्याप्त सहयोग नहीं मिलेगा, तो इसका असर सिर्फ कर्मचारियों के स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि देश की कार्य उत्पादकता और जन्म दर जैसी सामाजिक चुनौतियों पर भी लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकता है। यह एक गंभीर चेतावनी है कि अगर इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पैरेंटल लीव जैसी सुविधाओं का खुलकर इस्तेमाल न हो पाना कई कारणों से हो सकता है। इसमें कंपनी की संस्कृति, सहकर्मियों का रवैया, और नौकरी खोने का डर शामिल हो सकता है। कई बार कर्मचारियों को यह भी लगता है कि अगर वे लंबी छुट्टी लेंगे तो उनके काम पर असर पड़ेगा या उन्हें प्रमोशन में नुकसान हो सकता है।

यह सर्वे दक्षिण कोरियाई सरकार के उन दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है कि उनकी नीतियों से जन्म दर बढ़ी है। अगर लोग बच्चों की देखभाल के लिए जरूरी अवकाश ही नहीं ले पा रहे हैं, तो फिर जन्म दर में वृद्धि का श्रेय केवल सरकारी नीतियों को देना अधूरा लगता है। यह दिखाता है कि जमीनी हकीकत और सरकारी आंकड़ों के बीच एक बड़ा अंतर है।

इस स्थिति को सुधारने के लिए, सरकार को न केवल कानून बनाने होंगे, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू भी करवाना होगा। कंपनियों को ऐसी कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना होगा जहां पैरेंटल लीव को एक अधिकार के रूप में देखा जाए, न कि एक सुविधा के रूप में जिसका इस्तेमाल करने में झिझक हो। कर्मचारियों को यह भरोसा दिलाना होगा कि छुट्टी लेने से उनके करियर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

यह सर्वे एक आईना है जो दक्षिण कोरिया के कार्यस्थलों की हकीकत दिखाता है। जब तक कर्मचारी बिना किसी डर या दबाव के अपने परिवार के लिए समय निकाल पाएंगे, तब तक न तो जन्म दर में स्थायी वृद्धि संभव है और न ही एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण। यह एक ऐसी चुनौती है जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

रेकमेंडेड खबरें