बाजपुर में नकली एलोपैथिक दवाइयों का सिंडिकेट भंडाफोड़, एक गिरफ्तार

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Navbharat Times
देहरादून, 19 जुलाई। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने ऊधमसिंहनगर के बाजपुर में एक बड़े नकली दवाइयों के गिरोह का पर्दाफाश किया है। टीम ने कोविल बायोटेक पर छापा मारकर प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम से बन रही नकली एलोपैथिक दवाओं का जखीरा बरामद किया है। इस मामले में बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) के धीरेंद्र पुत्र ब्रह्म सिंह को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी आयुर्वेदिक और फूड लाइसेंस की आड़ में स्टैडमेड, मैकलियोड्स, इंटास और सन फार्मा जैसी नामी कंपनियों की नकली दवाइयां बनाकर बाजार में बेच रहा था।

छापेमारी के दौरान टीम को करीब एक लाख टैबलेट और 15 हजार सिरप की बोतलें मिलीं। इन नकली दवाओं का इस्तेमाल एसिडिटी, एंटीबायोटिक, दर्द, नसों की बीमारी, प्रोस्टेट, कैल्शियम और आयरन की कमी जैसी बीमारियों के इलाज में होता है। एसटीएफ ने आरोपी की निशानदेही पर एनएच-74 पर बने एक गोदाम पर भी छापा मारा। वहां से तैयार नकली दवाइयों के साथ-साथ अवैध शराब, उत्तराखंड आबकारी के होलोग्राम, रैपर, ढक्कन और पैकिंग का सामान भी मिला।
पूछताछ में आरोपी धीरेंद्र ने खुलासा किया कि वह हरियाणा से अवैध शराब मंगवाकर उत्तराखंड में सप्लाई करता था। इस कार्रवाई में अल्कासोल, सेफीफीन-200, सनक्लेव, गैबैपिन, वेल्टम, रुबर्ड सस्पेंशन, ऑस्टोकैल्शियम बी12 और सोमप्राज जैसी कई नकली दवाइयां जब्त की गईं। इसके अलावा, नकली दवाइयां बनाने वाली पैकेजिंग मशीनें, एसएस टैंक, फिलिंग, सीलिंग और लेबलिंग मशीनें भी बरामद हुईं।

पुलिस ने मौके से 1,632 क्वार्टर मैकडॉवेल नंबर-1, 1,016 बोतल तृतीय आरसीएस शराब और 1,000 खाली कांच की बोतलें भी जब्त कीं। उत्तराखंड आबकारी के होलोग्राम भी मिले हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बाजपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अवैध शराब की बरामदगी के मामले में आबकारी अधिनियम के तहत अलग से कार्रवाई की जा रही है। एसटीएफ का कहना है कि इस पूरे नकली दवाइयों और शराब के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। यह गिरोह लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा था और नकली दवाइयों के जरिए मोटा मुनाफा कमा रहा था।

यह कार्रवाई एसटीएफ और औषधि प्रशासन विभाग के बीच बेहतर तालमेल का नतीजा है। नकली दवाओं का कारोबार स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है। ऐसी दवाइयां न केवल बेअसर होती हैं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती हैं। इस गिरोह का भंडाफोड़ होने से लोगों को बड़ी राहत मिली है। एसटीएफ इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस रैकेट में शामिल सभी लोगों को पकड़ा जा सके। यह एक बड़ी सफलता है जो आम जनता को नकली दवाओं के खतरे से बचाने में मदद करेगी।

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