विक्टोरिया का नया कानून: गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स का चेहरा होगा बेनकाब, बच्चों की सुरक्षा पर जोर
विक्टोरिया का नया कानून: गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स का चेहरा होगा बेनकाब, बच्चों की सुरक्षा पर जोर
NewsPoint•
ऑस्ट्रेलिया का विक्टोरिया राज्य, बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब वहां गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स का चेहरा बेनकाब करने के लिए नए कानून लाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने यह घोषणा की है कि अगर किसी गुमनाम अकाउंट से नफरत फैलाई जाती है या कोई आपत्तिजनक गतिविधि होती है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को उस अकाउंट चलाने वाले की पहचान बतानी पड़ सकती है। यह कानून खास तौर पर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है।
विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने रविवार को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि परिवारों को अपने बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए और भी मजबूत कानूनी उपायों की जरूरत है। इन नए प्रस्तावित कानूनों के तहत, विक्टोरियन सिविल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (वीसीएटी) को खास अधिकार मिलेंगे। इन अधिकारों को \"डीमास्किंग\" अधिकार कहा जाएगा। इसका मतलब है कि वीसीएटी सोशल मीडिया कंपनियों को यह आदेश दे सकेगा कि वे नफरत फैलाने वाले गुमनाम अकाउंट चलाने वालों की पहचान उजागर करें। अगर यह कानून लागू हो जाता है, तो यह ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य में अपनी तरह का पहला कदम होगा।सरकार सोशल मीडिया और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ लापरवाही के मामलों में मुकदमा दायर करना भी आसान बनाना चाहती है। अभी के कानून के मुताबिक, अगर किसी बच्चे को सोशल मीडिया की वजह से नुकसान होता है, तो उसके परिवार को यह साबित करना पड़ता है कि बच्चे को कम से कम 10 प्रतिशत स्थायी मानसिक या शारीरिक क्षति हुई है। तभी वे हर्जाने का दावा कर सकते हैं। लेकिन नए प्रस्ताव में नाबालिगों से जुड़े ऐसे मामलों के लिए इस शर्त को खत्म करने की योजना है। यानी, बच्चों को हुए नुकसान के लिए हर्जाना मांगने के लिए यह साबित नहीं करना पड़ेगा कि नुकसान कितना गंभीर है। भविष्य में, वयस्कों के लिए भी ऐसे बदलावों पर विचार किया जाएगा।
विपक्ष के शैडो अटॉर्नी जनरल जेम्स न्यूबरी ने कहा है कि उनकी पार्टी इन सुधारों का समर्थन करती है। लेकिन वे कानून के सभी प्रावधानों और उनके असर को अच्छी तरह से समझने के बाद ही अपना अंतिम समर्थन देंगे।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हो रही है। साल 2026 की शुरुआत में अमेरिका की एक अदालत ने एक बहुत ही अहम फैसले में गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट और मेटा को सोशल मीडिया की लत से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया था। इस फैसले को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के असर को लेकर एक बड़ा मोड़ माना गया था।
विक्टोरिया सरकार ने यह भी बताया है कि इन प्रस्तावित कानूनों को अंतिम रूप देने से पहले ट्रिब्यूनल, अदालतों और अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कानून सभी के लिए सही और प्रभावी हो।
ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लगाने वाला दुनिया का पहला देश बन चुका है। अब विक्टोरिया राज्य का यह कदम ऑनलाइन दुनिया को बच्चों के लिए और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल है। यह कानून सोशल मीडिया कंपनियों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराएगा और ऑनलाइन उत्पीड़न को रोकने में मदद करेगा। गुमनाम अकाउंट्स के पीछे छिपे लोगों को अब जवाबदेह ठहराया जा सकेगा। यह बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।
यह कानून सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और साइबरबुलिंग जैसी समस्याओं से निपटने में भी सहायक होगा। जब लोगों को पता होगा कि उनकी पहचान उजागर हो सकती है, तो वे आपत्तिजनक बातें कहने से पहले दो बार सोचेंगे। यह ऑनलाइन माहौल को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
सरकार का यह प्रयास सराहनीय है। बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखना सबसे महत्वपूर्ण है और ऑनलाइन दुनिया में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना आज की जरूरत है। यह कानून इस दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।