घरेलू निवेशकों की खरीदारी से भारतीय शेयर बाजार को मजबूती, एफआईआई की बिकवाली की भरपाई

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 19 जुलाई: बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की जोरदार खरीदारी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारी बिकवाली को पूरी तरह से पाट दिया। यह दिखाता है कि दुनिया भर में अनिश्चितता के माहौल के बावजूद, भारत में मौजूद पैसा (तरलता) शेयर बाजार को मजबूती दे रहा है। विश्लेषकों ने रविवार को यह जानकारी दी।

पिछले हफ्ते, एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार से 8,743.35 करोड़ रुपये निकाल लिए थे। लेकिन, डीआईआई ने 8,790.75 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस वजह से एफआईआई की निकासी की भरपाई हो गई और सप्ताह के अंत में निफ्टी 24,334.30 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार के जानकारों का कहना है कि विदेशी और घरेलू निवेशकों के इस अलग-अलग रवैये से यह साफ होता है कि भारतीय शेयर बाजार को सहारा देने में घरेलू निवेशकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि भारत में अच्छी तरलता, मजबूत आर्थिक हालात और कंपनियों की कमाई बढ़ने की उम्मीदें, दुनिया भर की चुनौतियों के बावजूद बाजार को अंदर से मजबूत बना रही हैं। एक विश्लेषक ने कहा, "दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों के कारण, आने वाले समय में बाजार में थोड़ी हलचल बनी रह सकती है।"

पिछले हफ्ते वैश्विक संकेत मिले-जुले रहे। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और यह करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर बिकता रहा। इसके अलावा, मुद्रा बाजार में हलचल और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने भी निवेशकों की सोच पर असर डाला।

जानकारों का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक ब्याज दरों की दिशा को लेकर अनिश्चितता, आने वाले समय में बाजार को अस्थिर बनाए रख सकती है।

विश्लेषकों के अनुसार, आगे चलकर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों का सीजन बाजार की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा। इसी के आधार पर अलग-अलग सेक्टरों में निवेश का रुझान बदलेगा और कुछ खास शेयरों में मौके बनेंगे।

बाजार के विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे तेजी के दौर में सिर्फ भागते हुए शेयरों के पीछे न दौड़ें। इसके बजाय, उन्हें उन कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए जिनकी बुनियाद मजबूत हो, कमाई की अच्छी क्षमता हो और जो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हों। उन्होंने कहा कि आने वाले हफ्तों में निवेशकों का ध्यान पूरे बाजार की तेजी पर कम और कंपनियों के तिमाही नतीजों और उनकी कमाई के प्रदर्शन पर ज्यादा रहेगा। इसलिए, निवेशकों को सोच-समझकर रणनीति बनानी चाहिए और उन कंपनियों में निवेश करना चाहिए जिनके फंडामेंटल मजबूत हों और जिनकी कमाई की उम्मीदें अच्छी हों।

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