पंजाब यूनिवर्सिटी में 'लफ्ज, सुर और सफर': इरशाद कामिल और सतिंदर सरताज के साथ खास बातचीत
पंजाब यूनिवर्सिटी में 'लफ्ज, सुर और सफर': इरशाद कामिल और सतिंदर सरताज के साथ खास बातचीत
NewsPoint•
चंडीगढ़, 19 जुलाई। पंजाब यूनिवर्सिटी 26 जुलाई को अपने दो मशहूर पूर्व छात्रों, गीतकार इरशाद कामिल और सूफी गायक-कवि सतिंदर सरताज के साथ एक खास बातचीत का आयोजन कर रही है। इस कार्यक्रम का नाम 'लफ्ज, सुर और सफर' रखा गया है। यह आयोजन पंजाब यूनिवर्सिटी एलुमनाई एसोसिएशन (पीयूएए) और चंडीगढ़ सिटिजंस फाउंडेशन (सीसीएफ) मिलकर पंजाब यूनिवर्सिटी कन्वेंशन सेंटर में कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में प्रवेश बिल्कुल मुफ्त है, लेकिन इसके लिए पहले से रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। यह कोई आम प्रस्तुति नहीं होगी, बल्कि एक प्रेरणादायक बातचीत होगी। इसमें दोनों कलाकार अपने जीवन के सफर, खास पड़ावों और उन अनुभवों के बारे में बताएंगे जिन्होंने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। श्रोताओं को उनके गानों, संगीत, संघर्षों और सफलताओं के पीछे की कहानियों को जानने का मौका मिलेगा।
पंजाब यूनिवर्सिटी की कुलपति रेणु विग ने कहा कि यह कार्यक्रम नए छात्रों के लिए एक शानदार स्वागत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अपने दो बड़े पूर्व छात्रों को यूनिवर्सिटी में वापस बुलाना यूनिवर्सिटी और पूर्व छात्रों के बीच रिश्तों को और मजबूत करेगा। साथ ही, यह छात्रों और समाज के बीच अच्छी बातचीत को भी बढ़ावा देगा।इरशाद कामिल देश के जाने-माने गीतकार हैं और पंजाब यूनिवर्सिटी के ही पूर्व छात्र रह चुके हैं। उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया है। उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए कई हिट गाने लिखे हैं, जैसे ‘अगर तुम साथ हो’, ‘कुन फाया कुन’, ‘नादान परिंदे’, ‘फिर से उड़ चला’, ‘शायद’ और ‘बेखयाली’। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी का गान ‘शान-ओ-शौकत’ भी लिखा है। उनकी लेखनी में साहित्य की गहराई और आज के समय की अभिव्यक्ति का खूबसूरत संगम देखने को मिलता है।
सतिंदर सरताज एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के सूफी गायक, कवि, गीतकार और कलाकार हैं। वे भी पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं। पंजाबी साहित्य और सूफी संगीत को अपनी खास शैली में पेश करने के लिए वे बहुत मशहूर हैं। उन्होंने ‘साईं’, ‘उड़ारियां’, ‘मासूमियत’, ‘मैं ते मेरी जान’, ‘इबादत’ और ‘रुतबा’ जैसे गानों से दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है। उनके काम ने पंजाबी कविता और सूफी संगीत को पूरी दुनिया में मशहूर करने में अहम भूमिका निभाई है।
इस खास बातचीत का संचालन शिक्षाविद पुष्पिंदर स्याल और अर्चना आर. सिंह करेंगे। वे दोनों कलाकारों से साहित्य, संगीत, रचनात्मकता और उनके कलात्मक सफर से जुड़े अनुभवों पर चर्चा करेंगी। यह कार्यक्रम पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों, यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े कॉलेजों के छात्रों, साहित्य प्रेमियों, कलाकारों और संस्कृति में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए खुला है।
अपने करियर की शुरुआत करने वाले संस्थान में लौट रहे ये दोनों कलाकार साहित्य, संगीत और जीवन से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे। यूनिवर्सिटी ने बताया है कि कार्यक्रम में सीटें सीमित हैं, इसलिए जल्दी रजिस्ट्रेशन कराने की सलाह दी गई है। केवल रजिस्ट्रेशन कराने वालों को ही एंट्री मिलेगी और सभी को पहचान पत्र साथ लाना होगा।
यह कार्यक्रम उन सभी के लिए एक अनूठा अवसर है जो कला, साहित्य और संगीत की दुनिया में प्रेरणा ढूंढ रहे हैं। यह न केवल दो महान कलाकारों के जीवन की झलक देगा, बल्कि युवा पीढ़ी को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित भी करेगा। पंजाब यूनिवर्सिटी अपने पूर्व छात्रों के साथ इस तरह के आयोजन करके एक मजबूत समुदाय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। यह कार्यक्रम छात्रों को अपने क्षेत्र के सफल लोगों से सीधे जुड़ने का मौका देगा, जो उनके भविष्य के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।