ईरानी सेना का कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला: ऑपरेशन सैकेह के तहत ड्रोन से निशाना
ईरानी सेना का कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला: ऑपरेशन सैकेह के तहत ड्रोन से निशाना
NewsPoint•
ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने ऑपरेशन ‘सैकेह (लाइटनिंग)’ के तहत कुवैत में मौजूद अमेरिका के दो बड़े सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमला किया है। यह हमला अमेरिका द्वारा ईरान पर बार-बार किए जा रहे घातक हमलों के जवाब में किया गया है। इस हमले में कैंप उदैरी में अमेरिकी गोला-बारूद के भंडार और अली अल सलेम एयरबेस पर तैनात पैट्रियट मिसाइल रक्षा रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका ने ईरान के खुजेस्तान प्रांत में बन रहे डार्कहोविन न्यूक्लियर पावर प्लांट की साइट पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया था।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना ने ऑपरेशन ‘सैकेह (लाइटनिंग)’ के 16वें चरण के तहत कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन से हमला किया। सेना का कहना है कि यह अमेरिका द्वारा ईरान पर बार-बार किए गए हमलों का करारा जवाब है। सेना के मुताबिक, इन हमलों में आम नागरिकों की मौत हुई और पुलों, बुनियादी ढांचे तथा अन्य गैर-सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।ईरानी सेना ने बताया कि उनके ड्रोन हमलों ने कैंप उदैरी में मौजूद अमेरिकी गोला-बारूद के भंडार को निशाना बनाया। इसके अलावा, अली अल सलेम एयरबेस पर तैनात पैट्रियट मिसाइल रक्षा रडार सिस्टम और एक हवाई निगरानी रडार पर भी हमला किया गया। सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान पर लगातार किए गए हमलों के जवाब में की गई है, जिनमें आम नागरिकों की जान गई और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।
कैंप उदैरी, जो ईरान की सीमा से लगभग 104 किलोमीटर दूर स्थित है, अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य लॉजिस्टिक्स और फोर्स सपोर्ट केंद्र है। यह ठिकाना अमेरिकी सेना के लिए सामान और सैनिकों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, अली अल सलेम एयर बेस अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए एक अहम एयरलिफ्ट केंद्र है। इसे पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के मुख्य प्रवेश द्वारों में से एक माना जाता है।
इससे पहले रविवार की सुबह, अमेरिका ने ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के खुजेस्तान प्रांत में बन रहे डार्कहोविन न्यूक्लियर पावर प्लांट की साइट पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया था। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (एईओआई) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि यह हमला स्थानीय समय के अनुसार सुबह 3:39 बजे हुआ। संगठन ने इस हमले को "आक्रामक और क्रूर कार्रवाई" बताया और कहा कि यह ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। हालांकि, संगठन ने यह नहीं बताया कि इस हमले में कोई हताहत हुआ है या किसी तरह का नुकसान हुआ है।
ईरानी सेना के इस दावे से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच यह सैन्य टकराव एक गंभीर चिंता का विषय है, खासकर परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बाद। यह घटनाक्रम ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और अधिक जटिल बना सकता है।