ट्राई ने ट्रूकॉलर को 140 और 1600 नंबर सीरीज कॉल्स पर 'फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड' टैग हटाने को कहा
ट्राई ने ट्रूकॉलर को 140 और 1600 नंबर सीरीज कॉल्स पर 'फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड' टैग हटाने को कहा
NewsPoint•
नई दिल्ली, 19 जुलाई: टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने कॉलर पहचान ऐप ट्रूकॉलर को 140 और 1600 नंबर सीरीज से आने वाली कॉल्स पर "फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड" (अक्सर ब्लॉक की जाने वाली) का लेबल लगाने से मना किया है। ट्राई का मानना है कि यह कदम ग्राहकों को गुमराह कर सकता है और ज़रूरी सरकारी व व्यावसायिक संदेशों पर शक पैदा कर सकता है। ट्राई ने सुझाव दिया है कि ट्रूकॉलर को स्पैम कॉल्स को ब्लॉक करने के बजाय, ग्राहकों को ट्राई के 'डू नॉट डिस्टर्ब' (डीएनडी) ऐप के बारे में जानकारी देनी चाहिए, जिससे वे खुद अनचाहे प्रमोशनल कॉल्स को ब्लॉक कर सकें।
ट्राई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा कि रेगुलेटेड नंबर सीरीज को "फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड" जैसे टैग से जोड़ना गलत है। इससे लोगों के मन में भ्रम पैदा होता है और रेगुलेटर द्वारा तय किए गए नियमों के तहत आने वाली कॉल्स पर उनका भरोसा कम हो जाता है। अधिकारी ने जोर देकर कहा कि अलग-अलग नंबरों को लेबल करने की बजाय, डीएनडी सिस्टम के बारे में लोगों को ज़्यादा जागरूक करना एक बेहतर तरीका है। इससे ग्राहक अपने कम्युनिकेशन से जुड़े फैसलों को खुद बेहतर ढंग से संभाल पाएंगे।यह समझना ज़रूरी है कि 1600 नंबर सीरीज खास तौर पर बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) कंपनियों के लिए है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI), इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) जैसी संस्थाओं की निगरानी में काम करने वाली कंपनियां इसी सीरीज का इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा, सरकार और आम नागरिकों के बीच बातचीत के लिए भी 1600 सीरीज का उपयोग होता है।
वहीं, 140 नंबर सीरीज को विभिन्न क्षेत्रों की रजिस्टर्ड कंपनियों द्वारा प्रमोशनल कॉल्स के लिए तय किया गया है। ट्राई ने चेतावनी दी है कि 1600 सीरीज के नंबरों को किसी भी सूरत में ऐसा मार्क नहीं किया जाना चाहिए कि ग्राहक उन्हें उठाने से कतराएं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन नंबरों से आने वाली कॉल्स में ज़रूरी फ्रॉड अलर्ट, ट्रांजैक्शन वेरिफिकेशन, बैंकिंग नोटिफिकेशन और सरकारी सूचनाएं शामिल हो सकती हैं। इन कॉल्स को ब्लॉक करने से ग्राहकों को नुकसान हो सकता है।
दूसरी ओर, ट्रूकॉलर का कहना है कि ट्राई द्वारा डेडिकेटेड नंबर सीरीज के इस्तेमाल को अनिवार्य करने और कॉलर पहचान ऐप्स को इन नंबरों के लिए कम्युनिटी-रिपोर्टेड स्पैम जानकारी दिखाने से रोकने के बाद से स्पैम कॉल्स में बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के अनुसार, कई यूजर्स इन सीरीज से आने वाली कॉल्स को नज़रअंदाज़ या ब्लॉक करना शुरू कर रहे हैं, जिससे असली बिजनेस कम्युनिकेशन पर भरोसा कम हो रहा है। ट्रूकॉलर का मानना है कि उनके ऐप पर दिखाई जाने वाली जानकारी यूजर्स को स्पैम कॉल्स से बचाने में मदद करती है।
ट्राई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को सही और ज़रूरी जानकारी मिले, और वे किसी भी तरह के धोखे या गुमराह होने से बचें। 1600 सीरीज के नंबरों को ब्लॉक करने से ग्राहकों को महत्वपूर्ण वित्तीय और सरकारी सूचनाएं नहीं मिल पाएंगी, जो उनके लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए, ट्राई चाहता है कि ट्रूकॉलर जैसी कंपनियां अपनी नीतियों में बदलाव करें और ग्राहकों को जागरूक करने पर ज़्यादा ध्यान दें, न कि रेगुलेटेड नंबरों को गलत तरीके से लेबल करने पर। यह ग्राहकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है।