बांग्लादेश में खसरे से 788 बच्चों की मौत, 1.17 लाख से अधिक संदिग्ध मामले

NewsPoint
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ढाका, 19 जुलाई: बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहाँ पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों से चार और बच्चों की मौत हो गई। इससे देश में खसरे से जुड़ी मौतों का कुल आंकड़ा 788 तक पहुँच गया है। यह चिंताजनक स्थिति तब है जब देश का स्वास्थ्य तंत्र पहले से ही डेंगू के बढ़ते मामलों से जूझ रहा है, जिससे अस्पतालों पर भारी दबाव है और मौतों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर डेंगू के मामलों में अचानक वृद्धि हुई तो मौजूदा सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं पर और बोझ पड़ेगा और इलाज की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, नई मौतों को खसरे से संदिग्ध रूप से जोड़ा गया है। बांग्लादेश में खसरे से संदिग्ध मौतों की कुल संख्या अब 693 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला जांच में 95 मौतों की पुष्टि हुई है। यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में खसरे के 938 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे देश में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 1,17,648 हो गई है। इसी अवधि में खसरे के 113 नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए, जिससे प्रयोगशाला जांच से पुष्टि किए गए संक्रमणों की कुल संख्या 14,431 हो गई है।
यह दोहरा संकट बांग्लादेश के स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। ढाका के बड़े सरकारी अस्पताल, जो पहले डेंगू के प्रकोप के दौरान हजारों मरीजों का इलाज कर चुके थे, अब खसरे के मरीजों के बढ़ते बोझ से जूझ रहे हैं। बांग्लादेश में खसरे के रोजाना 900 से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर पहले से ही भारी दबाव है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर डेंगू के मामलों में अचानक वृद्धि हुई तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। बांग्लादेशी अखबार 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, जून में डेंगू की स्थिति और बिगड़ गई थी। इस साल अब तक दर्ज किए गए कुल डेंगू मामलों में से 48 प्रतिशत और कुल मौतों में से 72 प्रतिशत मामले जून में ही सामने आए थे। यह दर्शाता है कि डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त में मानसून के चरम पर एडीज मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनता है। यदि इन मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो डेंगू के मामले और बढ़ सकते हैं। बांग्लादेश मेडिकल यूनिवर्सिटी (बीएमयू) के आंतरिक चिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर फजले रब्बी चौधरी ने कहा कि हालांकि खसरे के मामलों में कमी आनी शुरू हो गई है, लेकिन यह कमी उम्मीद के मुताबिक तेज नहीं है।

फजले रब्बी चौधरी ने 'द डेली स्टार' के हवाले से कहा, "इसी समय मानसून मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है और डेंगू के मामले पहले ही बढ़ने लगे हैं। इससे निश्चित रूप से अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।" यह स्थिति एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

इस दोहरी चुनौती से निपटने के लिए, फजले रब्बी चौधरी और अन्य विशेषज्ञों ने बांग्लादेश सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने मच्छरों के लार्वा को खत्म करने के उपायों को बढ़ाने, अस्थायी इलाज केंद्रों का विस्तार करने और डेंगू के मरीजों के लिए अलग वार्ड या यूनिट बनाने का सुझाव दिया है। इन उपायों से खसरा और डेंगू, दोनों बीमारियों के बढ़ते बोझ को प्रभावी ढंग से संभाला जा सकेगा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकेगा। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि दोनों बीमारियों के प्रकोप को नियंत्रित किया जाए ताकि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।

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