जयपुर: आरटीओ की कार्रवाई से नाराज बस मालिक ने डीजल डालकर आत्मदाह की कोशिश की, टला बड़ा हादसा
जयपुर: आरटीओ की कार्रवाई से नाराज बस मालिक ने डीजल डालकर आत्मदाह की कोशिश की, टला बड़ा हादसा
NewsPoint•
जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड के बाहर रविवार शाम को उस वक्त हड़कंप मच गया जब आरटीओ की कार्रवाई से नाराज़ एक बस मालिक ने खुद पर डीज़ल डालकर आग लगाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों और कर्मचारियों की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया। यह घटना रविवार शाम करीब 5 बजे हुई, जब परिवहन विभाग की टीम स्लीपर बसों के खिलाफ एक विशेष अभियान चला रही थी।
जानकारी के मुताबिक, आरटीओ की टीम ने ग्वालियर रूट पर चलने वाली एक निजी स्लीपर बस को कथित नियमों के उल्लंघन के चलते जब्त करने की कार्रवाई शुरू की। बस के मालिक हाकिम सिंह चौधरी ने अधिकारियों से बस जब्त न करने की गुहार लगाई। हाकिम सिंह का कहना था कि अगर कोई नियम तोड़ा गया है तो उसका चालान कर दिया जाए, लेकिन बस को जब्त न किया जाए क्योंकि उन्हें यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाना था।बस मालिक ने आरोप लगाया कि उन्होंने अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर और पैर पकड़कर भी विनती की, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। उन्होंने कहा कि इसके बाद वे मानसिक रूप से टूट गए और गुस्से व निराशा में बस से डीज़ल निकालकर खुद पर डाल लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने माचिस निकालकर आग लगाने की भी कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें रोक लिया और स्थिति को संभाला।
घटना के बाद भावुक हुए हाकिम सिंह ने बताया कि उनकी उम्र 61 साल है और वे दिल के मरीज हैं। उनके अनुसार, हर महीने उनकी दवाइयों पर 18 से 20 हजार रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आर्थिक तंगी के कारण वे खुद अपनी बस में कंडक्टर का काम करते हैं, ताकि किसी और को तनख्वाह न देनी पड़े और परिवार का खर्च चल सके।
इस घटना के बाद परिवहन विभाग की कार्रवाई और निजी बस संचालकों की समस्याओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बस संचालक कह रहे हैं कि नियमों का पालन तो जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया जाना चाहिए। वहीं, आरटीओ की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान का इंतजार है। विभाग को यह साफ करना चाहिए कि बस के खिलाफ किस आधार पर कार्रवाई की गई थी और क्या वाकई नियमों का उल्लंघन हुआ था।
समय रहते लोगों के हस्तक्षेप से आत्मदाह की कोशिश नाकाम हो गई और एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद मौके पर काफी देर तक लोगों की भीड़ जमा रही। फिलहाल, इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है। इस घटना ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और निजी बस संचालकों की आर्थिक मुश्किलों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
यह घटना सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही है, जिसमें बस मालिक को डीज़ल डालते हुए और लोगों द्वारा उसे रोकते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है और कई लोग बस मालिक की मजबूरी पर सहानुभूति जता रहे हैं।
परिवहन विभाग की उड़नदस्ता टीम स्लीपर बसों के खिलाफ विशेष अभियान चला रही थी। इसी अभियान के तहत यह बस रोकी गई थी। बस मालिक का कहना है कि वह यात्रियों को लेकर जा रहा था और ऐसे में बस जब्त करना यात्रियों के लिए भी परेशानी का सबब बनता।
हाकिम सिंह ने बताया कि वह कई सालों से यह बस चला रहे हैं और उनका परिवार इसी पर निर्भर है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनसे कोई गलती हुई है तो वे उसे सुधारने को तैयार हैं, लेकिन इस तरह बस जब्त करना उनके लिए आजीविका का संकट पैदा कर देगा।
इस पूरे मामले में यह देखना अहम होगा कि परिवहन विभाग क्या कार्रवाई करता है और क्या निजी बस संचालकों की समस्याओं पर कोई ध्यान दिया जाता है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि नियमों के पालन के साथ-साथ मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखना कितना जरूरी है।