सिक्किम की समारदुंग सुरंग में भूस्खलन और मीथेन रिसाव: 27 मजदूर फंसे, बचाव कार्य जारी

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सिक्किम के दक्षिणी जिले में निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग में सोमवार दोपहर हुए भूस्खलन और मीथेन गैस रिसाव की भयावह घटना में करीब 27 लोगों के फंसे होने की आशंका है. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सिक्किम पुलिस और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं. यह हादसा तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के तहत पटेल इंजीनियरिंग द्वारा बनाई जा रही सुरंग में हुआ, जहां अचानक भूस्खलन से रास्ता बंद हो गया और कई मजदूर अंदर फंस गए. मीथेन गैस के रिसाव ने स्थिति को और भी खतरनाक बना दिया है, जिससे बचावकर्मियों के लिए अंदर जाना बेहद जोखिम भरा हो गया है.

यह गंभीर हादसा सोमवार दोपहर करीब 3:09 बजे ममरिंग स्थित समारदुंग सुरंग में हुआ. यह सुरंग तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है और इसे पटेल इंजीनियरिंग बना रही है. घटना के तुरंत बाद, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सिक्किम पुलिस और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की टीमें बचाव कार्य में जुट गईं.
नमची जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही सिलिगुड़ी और पाक्योंग में तैनात एनडीआरएफ टीमों और एसडीआरएफ को तुरंत अलर्ट कर दिया गया था. उन्होंने कहा, “घटना दोपहर करीब 3:09 बजे हुई. समारदुंग पहुंचने के दौरान ही हमने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों को सूचना दे दी थी.”

शुरुआत में, अग्निशमन विभाग और पुलिसकर्मियों ने बिना विशेष सुरक्षा उपकरणों के दो बार सुरंग में घुसने की कोशिश की. लेकिन, सुरंग के अंदर की खतरनाक स्थिति के कारण वे फंसे हुए लोगों तक नहीं पहुंच सके. जिला कलेक्टर ने बताया कि सुरंग के भीतर मीथेन गैस की मात्रा बहुत अधिक होने के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है.

पहली एनडीआरएफ टीम ने उन अग्निशमन कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला जो घटना के बाद अंदर गए थे. इसके बाद, दूसरी एनडीआरएफ टीम ने सुरंग में प्रवेश किया और बचाव अभियान जारी रखा. हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, गैस का स्तर इतना अधिक है कि बचावकर्मियों को अभी तक उस स्थान तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है. कई बचावकर्मियों को अंदर संपर्क स्थापित करने से पहले ही वापस लौटना पड़ा.

प्रशासन अभी तक भूस्खलन के सटीक कारण का पता नहीं लगा पाया है. जिला कलेक्टर ने बताया कि सुरंग से बाहर निकलने में सफल कुछ मजदूरों ने बताया कि उन्होंने अंदर से विस्फोट जैसी तेज आवाज सुनी थी, जिसके बाद वे तुरंत बाहर भागे. लेकिन, कई अन्य मजदूर अभी भी सुरंग के भीतर फंसे हुए हैं.

फंसे हुए लोगों की संख्या को लेकर भी अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है. अनुपा तामलिंग ने बताया, “प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब 19 मजदूर अंदर फंसे थे. बाद में बचाव के लिए पटेल इंजीनियरिंग के तीन कर्मचारी सुरंग में गए, जिनमें से दो भी अंदर फंस गए. इससे कंपनी के कुल 21 लोगों के अंदर होने की आशंका है. इसके अलावा एनएचपीसी के छह कर्मचारी भी सुरंग के भीतर बताए जा रहे हैं, जिससे कुल संख्या 27 तक पहुंचती है. वास्तविक संख्या इससे कम या अधिक भी हो सकती है.”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक एनडीआरएफ टीम फंसे हुए लोगों के सटीक स्थान तक नहीं पहुंच जाती, तब तक अंदर की स्थिति की पुष्टि नहीं की जा सकती. जिला प्रशासन ने साफ किया है कि उनकी पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग के भीतर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है.

यह घटना एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाती है. तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना जैसी बड़ी परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. मीथेन गैस एक ज्वलनशील गैस है और इसका रिसाव किसी भी समय बड़े खतरे का कारण बन सकता है. ऐसे में, बचाव अभियान में विशेष उपकरणों और प्रशिक्षित टीमों की आवश्यकता होती है, जैसा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें कर रही हैं.

इस तरह की दुर्घटनाएं न केवल मजदूरों के जीवन के लिए खतरा पैदा करती हैं, बल्कि बचाव कार्यों को भी बेहद जटिल बना देती हैं. मीथेन गैस की उपस्थिति के कारण, बचावकर्मियों को विशेष श्वसन उपकरण और अन्य सुरक्षात्मक गियर का उपयोग करना पड़ता है. इसके अलावा, सुरंग के अंदर की अस्थिर भूवैज्ञानिक स्थिति भी बचाव अभियान में बाधा डाल सकती है.

प्रशासन और संबंधित कंपनियां अब इस बात की जांच करेंगी कि भूस्खलन का कारण क्या था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है. मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियमों और उनकी नियमित निगरानी की आवश्यकता है. उम्मीद है कि फंसे हुए सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा और यह घटना भविष्य के लिए एक सबक बनेगी.

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