पश्चिम बंगाल में फर्जी जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र गिरोह पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कई दफ्तरों में छापेमारी
पश्चिम बंगाल में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र गिरोह पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कई दफ्तरों में छापेमारी
NewsPoint•
कोलकाता, 23 जुलाई। पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुवार को राज्य भर की विभिन्न पंचायतों और नगर पालिकाओं में बड़े पैमाने पर छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई जन्म और मृत्यु के फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोहों का पर्दाफाश करने के लिए की गई है। पुलिस को शक है कि ये गिरोह हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सक्रिय हुए थे। जिन इलाकों में यह अभियान चलाया जा रहा है, उनमें बीरभूम जिले के सूरी, रामपुरहाट और दुबराजपुर, कूचबिहार जिले का कूचबिहार शहर और पश्चिम बर्दवान जिले का औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।
राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वोटर लिस्ट में तेजी से सुधार की प्रक्रिया के दौरान पूरे राज्य में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने के आरोप सामने आए थे। यह आरोप है कि कुछ पंचायतों और नगर पालिकाओं के कर्मचारियों की मिलीभगत से गलत तरीके से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए और फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह सक्रिय हो गए। यह भी आरोप लगाया गया कि फर्जी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए इस तरह के अवैध काम को बढ़ावा दिया गया। अब प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इन गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें खत्म करने का फैसला किया है।इसी कड़ी में गुरुवार सुबह से ही अलग-अलग नगर पालिका और पंचायत कार्यालयों में पुलिस की छापेमारी शुरू कर दी गई है, जो अभी भी जारी है। जांच अधिकारी संबंधित दफ्तरों में जन्म और मृत्यु पंजीकरण का काम संभालने वाले कर्मचारियों से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस इस मामले की आगे की जांच के लिए नगर पालिकाओं और पंचायतों के जन्म-मृत्यु पंजीकरण रजिस्टर और उनसे जुड़े दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कहीं कोई जन्म प्रमाण पत्र गैर-कानूनी तरीके से तो जारी नहीं किया गया है या फिर किसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रमाण पत्र तो नहीं बनाया गया है।
राज्य पुलिस अधिकारी ने आगे कहा कि जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकते हैं। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार के सत्ता में आने के बाद पश्चिम बंगाल में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कई नए नियम लागू किए गए थे। फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने दस्तावेजों के पंजीकरण की प्रक्रिया में भी बदलाव किए थे। कैबिनेट की बैठक के बाद इस संबंध में एक नया नोटिफिकेशन जारी किया गया था।
यह पूरा मामला वोटर लिस्ट में गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है। चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया था। इसी दौरान यह बात सामने आई कि कुछ लोग फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर नए मतदाताओं को सूची में शामिल करवा रहे थे। यह सब कुछ पंचायतों और नगर पालिकाओं के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा था। इन कर्मचारियों ने पैसे लेकर फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए, जिससे वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जा सके।
पुलिस को शक है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और इसका जाल पूरे राज्य में फैला हुआ है। इन गिरोहों का मकसद सिर्फ वोटर लिस्ट में हेरफेर करना ही नहीं था, बल्कि वे अन्य अवैध कामों के लिए भी फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर सकते थे। इसलिए पुलिस इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
छापेमारी के दौरान पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। कुछ कर्मचारियों से पूछताछ में यह भी पता चला है कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के लिए किस तरह के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था और किन लोगों के संपर्क में ये गिरोह थे। पुलिस अब इन सभी जानकारियों को इकट्ठा करके एक बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
यह अभियान आम जनता के लिए एक संदेश है कि फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। सरकार और पुलिस मिलकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से हों।
इस मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया जाएगा और इसमें शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रियाओं की शुचिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।