विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आसियान की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता पर बोले

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Navbharat Times
मनीला में 21वें ईस्ट एशिया समिट (ईएएस) को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि भारत 'आसियान' की केंद्रीय भूमिका, क्षेत्रीय स्थिरता और एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. उन्होंने दुनिया की मौजूदा अनिश्चित और अस्थिर स्थिति पर चिंता व्यक्त की, जहाँ देशों के बीच निर्भरता और साझा हितों के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा और टकराव भी बढ़ रहा है. जयशंकर ने बताया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कई संघर्षों से जूझ रही है, और ग्लोबल साउथ के देशों के लिए ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी बुनियादी ज़रूरतें अब पहले जैसी निश्चित नहीं रह गई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीकें, बढ़ती पहुंच और बदलते अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के कारण दुनिया में बड़े बदलाव आ रहे हैं, जहाँ राजनीति और सुरक्षा के मुद्दे अक्सर अर्थव्यवस्था और कार्यकुशलता से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं.

विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्षों को बातचीत और कूटनीति से हल करने पर ज़ोर दिया. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते सुरक्षित रहने चाहिए और उन पर अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार बिना किसी रुकावट के आवाजाही होनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सूरत में नाविकों, आम नागरिकों के जहाजों या महत्वपूर्ण ढांचों पर हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि भारत एक ऐसे प्रभावी, ठोस और कानूनी रूप से बाध्यकारी 'आचार संहिता' का समर्थन करता है जो 'समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन 1982' (यूएनसीएलओएस 1982) के अनुरूप हो और किसी भी वैध उपयोगकर्ता के अधिकारों को नुकसान न पहुंचाए. उन्होंने म्यांमार के मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की भारत की इच्छा दोहराई और इस दिशा में 'आसियान' के प्रयासों को लगातार समर्थन देने की बात कही.

इसके अलावा, विदेश मंत्री ने साइबर ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ मिलकर सख्त कार्रवाई करने की अपील की. उन्होंने बताया कि ऐसे साइबर स्कैम सेंटर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को अपना शिकार बना चुके हैं. जयशंकर ने यह भी जानकारी दी कि भारत जल्द ही कोच्चि में 7वें ईस्ट एशिया समिट समुद्री सुरक्षा सहयोग सम्मेलन की मेजबानी करेगा. साथ ही, लोथल में ईस्ट एशिया समिट मैरिटाइम हेरिटेज फेस्टिवल का भी आयोजन किया जाएगा.

जयशंकर ने कहा कि दुनिया का माहौल इस समय काफी अनिश्चित और अस्थिर बना हुआ है. एक तरफ देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं और उनके साझा हित हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रतिस्पर्धा और आपसी टकराव भी बढ़ रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय कई संघर्षों के असर से जूझ रही है. खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी जरूरी चीजों को अब पहले की तरह तय मानकर नहीं चल सकते.

उन्होंने आगे कहा कि नई तकनीकों, बढ़ती पहुंच और बदलते अंतरराष्ट्रीय रिश्तों की वजह से दुनिया में बड़े बदलाव हो रहे हैं. अब राजनीति और सुरक्षा के मुद्दे कई बार अर्थव्यवस्था और कार्यकुशलता से भी ज् यादा अहम हो गए हैं. साथ ही, जोखिम लेने और सीमाओं को आगे बढ़ाने की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है.

भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें और उन पर बिना किसी रुकावट के आवाजाही होनी चाहिए. यह सब अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होना चाहिए. उन्होंने कहा, “किसी भी हाल में नाविकों, आम नागरिकों के जहाज़ों या महत्वपूर्ण ढांचे पर हमलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता.”

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि भारत एक ऐसे प्रभावी, ठोस और कानूनी रूप से बाध्यकारी ‘आचार संहिता’ का समर्थन करता है, जो ‘समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन 1982’ (यूएनसीएलओएस 1982) के अनुरूप हो और किसी भी वैध उपयोगकर्ता के अधिकारों को नुकसान न पहुंचाए. उन्होंने कहा कि भारत म्यांमार के मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और इस दिशा में ‘आसियान’ के प्रयासों का लगातार समर्थन करता रहेगा.

जयशंकर ने साइबर ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ मिलकर सख्त कार्रवाई करने की भी अपील की. उन्होंने कहा कि ऐसे साइबर स्कैम सेंटर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को अपना शिकार बना चुके हैं. जयशंकर ने बताया कि भारत जल्द ही कोच्चि में 7वें ईस्ट एशिया समिट समुद्री सुरक्षा सहयोग सम्मेलन की मेजबानी करेगा. इसके अलावा, लोथल में ईस्ट एशिया समिट मैरिटाइम हेरिटेज फेस्टिवल का भी आयोजन किया जाएगा.

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