अमला शंकर: आधुनिक भारतीय नृत्य की पुरोधा, कान्स में 93 साल की उम्र में बनीं सबसे युवा स्टार

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नई दिल्ली, 23 जुलाई। 93 साल की उम्र में कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर अपनी मुस्कान और आत्मविश्वास से सबको चौंकाने वालीं अमला शंकर, आधुनिक भारतीय नृत्य की वो महान हस्ती थीं जिन्होंने अपनी कला से दुनिया भर में भारत का नाम रोशन किया। 2012 में 'कल्पना' फिल्म के डिजिटल संस्करण की स्क्रीनिंग के लिए पहुंचीं अमला ने खुद को 'सबसे युवा फिल्म स्टार' कहकर सबको हंसा दिया था। 27 जून 1919 को ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसीडेंसी में जन्मीं अमला नंदी, जिनका बचपन का नाम था, एक ऐसे परिवार से थीं जो शिक्षा और कला को बहुत महत्व देता था। उनके पिता अक्षय कुमार नंदी प्रकृति प्रेमी थे और कला के बड़े समर्थक थे।

11 साल की अमला जब 1931 में अपने पिता के साथ पेरिस के 'अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक प्रदर्शनी' में गईं, तो उनकी मुलाकात महान भारतीय नर्तक उदय शंकर और उनके परिवार से हुई। उदय शंकर की मां हेमांगिनी देवी ने अमला को प्यार से एक साड़ी दी, और यहीं से अमला के कलात्मक सफर की शुरुआत हुई। वह उदय शंकर के नृत्य दल का हिस्सा बन गईं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जो अमला की नृत्य में दिलचस्पी जानते थे, उन्होंने अमला के पिता को उन्हें अल्मोड़ा में उदय शंकर डांस अकादमी भेजने के लिए मना लिया। बाद में, उन्होंने अमला को यूरोप में भारत के सांस्कृतिक दूत के तौर पर भी भेजा। 1931 में ही बेल्जियम में 'कालिया दमन' नामक प्रस्तुति से अमला ने पहली बार मंच पर कदम रखा।
जैसे-जैसे उदय शंकर और अमला नृत्य की दुनिया में आगे बढ़े, उनका रिश्ता भी गहरा होता गया। 1939 में जब उनका नृत्य दल चेन्नई में था, तब उदय शंकर ने अमला को शादी का प्रस्ताव दिया। 1942 में दोनों ने शादी कर ली। इस प्रतिभाशाली जोड़े को दो बच्चे हुए - 1942 में बेटे आनंद शंकर, जो एक मशहूर संगीतकार बने, और 1954 में बेटी ममता शंकर, जो एक जानी-मानी नृत्यांगना और अभिनेत्री हैं।

मंच पर अपनी कला दिखाने के साथ-साथ, अमला शंकर ने 1948 में उदय शंकर की फिल्म 'कल्पना' में मुख्य भूमिका भी निभाई। यह फिल्म एक युवा नर्तक के अपने डांस अकादमी खोलने के सपने पर आधारित थी। अमला सिर्फ एक बेहतरीन नृत्यांगना ही नहीं थीं, बल्कि एक कमाल की चित्रकार भी थीं। उनकी चित्रकारी की सबसे खास बात यह थी कि वह कभी ब्रश का इस्तेमाल नहीं करती थीं। वह अपनी उंगलियों, नाखूनों और टूथपिक से ही कैनवास पर रंग भर देती थीं। उन्होंने लेखन में भी अपना योगदान दिया। उनकी लिखी एक किताब की प्रस्तावना खुद नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने लिखी थी।

अमला शंकर का जीवन सिर्फ कला तक ही सीमित नहीं था। अल्मोड़ा केंद्र बंद होने के बाद, उन्होंने कोलकाता में उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर (यूएसआईसीसी) की स्थापना की। यहां उन्होंने पांच साल की छोटी उम्र से ही बच्चों को भारतीय कला की शिक्षा देना शुरू कर दिया। वह 'स्त्री शक्ति – द पैरेलल फोर्स' जैसे सामाजिक अभियानों से भी जुड़ी रहीं। सत्य साईं बाबा की वह बहुत बड़ी भक्त थीं और उनका आध्यात्मिक जीवन भी काफी समृद्ध था। उन्होंने 92 साल की उम्र में 'सीता स्वयंवर' नामक नृत्य नाटिका में राजा जनक की भूमिका निभाकर सबको हैरान कर दिया था। 24 जुलाई 2020 को कोलकाता में सोते हुए दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

अमला शंकर का जन्म 27 जून 1919 को ब्रिटिश इंडिया के बंगाल प्रेसीडेंसी के मगूरा जिले में हुआ था, जो आज बांग्लादेश में है। उनका बचपन का नाम अमला नंदी था। उनके पिता अक्षय कुमार नंदी शिक्षा और कला के बड़े समर्थक थे। उन्हें प्रकृति और ग्रामीण जीवन से भी बहुत लगाव था। 1931 में, जब अमला सिर्फ 11 साल की थीं, वह अपने पिता के साथ पेरिस में 'अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक प्रदर्शनी' देखने गईं। वहां उनकी मुलाकात महान भारतीय नर्तक उदय शंकर और उनके परिवार से हुई। उदय शंकर की मां हेमांगिनी देवी ने अमला को प्यार से एक साड़ी दी। यहीं से अमला का कलात्मक सफर शुरू हुआ और वह उदय शंकर के नृत्य दल का हिस्सा बन गईं।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जो अमला की नृत्य में रुचि से वाकिफ थे, उन्होंने अमला के पिता को उन्हें अल्मोड़ा में उदय शंकर डांस अकादमी भेजने के लिए राजी किया। बाद में, उन्होंने अमला को यूरोप में भारत के सांस्कृतिक दूत के रूप में भी भेजा। 1931 में ही बेल्जियम में 'कालिया दमन' नामक प्रस्तुति के साथ अमला ने मंच पर अपना पहला कदम रखा।

नृत्य की दुनिया में अपनी यात्राओं के दौरान, उदय शंकर और अमला के बीच का रिश्ता और भी गहरा हो गया। 1939 में, जब उनका नृत्य दल चेन्नई में ठहरा हुआ था, तब उदय शंकर ने अमला को शादी का प्रस्ताव दिया। 1942 में दोनों ने शादी कर ली। इस जोड़े को दो बच्चे हुए। दिसंबर 1942 में उनके बेटे आनंद शंकर का जन्म हुआ, जो एक प्रसिद्ध संगीतकार बने। जनवरी 1954 में उनकी बेटी ममता शंकर का जन्म हुआ, जो एक जानी-मानी नृत्यांगना और अभिनेत्री हैं।

मंच पर अपनी कला दिखाने के अलावा, अमला शंकर ने 1948 में उदय शंकर की फिल्म 'कल्पना' में मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म एक युवा नर्तक के अपने डांस अकादमी खोलने के सपने पर आधारित थी। अमला सिर्फ एक अद्भुत नृत्यांगना ही नहीं थीं, बल्कि एक बहुमुखी चित्रकार भी थीं। उनकी चित्रकारी की सबसे खास बात यह थी कि वह कभी तूलिका (ब्रश) का इस्तेमाल नहीं करती थीं। वह केवल अपनी उंगलियों, नाखूनों और टूथपिक के सहारे कैनवास पर रंग उकेरती थीं। उन्होंने लेखन में भी अपना योगदान दिया। उनकी लिखी एक किताब की प्रस्तावना स्वयं नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने लिखी थी।

अमला शंकर का जीवन केवल कला तक ही सीमित नहीं था। अल्मोड़ा केंद्र बंद होने के बाद, उन्होंने कोलकाता में उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर (यूएसआईसीसी) की स्थापना की। यहां उन्होंने पांच साल की छोटी उम्र से ही बच्चों को भारतीय कला के संस्कार देना शुरू कर दिया। वह 'स्त्री शक्ति – द पैरेलल फोर्स' जैसे सामाजिक अभियानों से भी जुड़ी रहीं। सत्य साईं बाबा की वह एक परम भक्त थीं और उनका आध्यात्मिक जीवन भी काफी समृद्ध था। उन्होंने 92 साल की उम्र में 'सीता स्वयंवर' नामक नृत्य नाटिका में राजा जनक की भूमिका निभाकर दर्शकों को चकित कर दिया था। 24 जुलाई 2020 को कोलकाता में सोते हुए दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

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