राज्यसभा में प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि, कई राज्यों में भारी तबाही

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। राज्यसभा ने गुरुवार को देश भर में प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी और उनकी याद में मौन रखा। इस मौन के ज़रिए सदन ने आपदा पीड़ितों के प्रति एकजुटता और संवेदना जताई। मानसून के दौरान देश के कई हिस्सों में आई भीषण प्राकृतिक आपदाओं में कई लोगों की जान गई और भारी नुकसान हुआ।

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की ओर से दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जून और जुलाई 2026 के दौरान देश के कई राज्यों में हुई भारी बारिश, बाढ़, आकाशीय बिजली गिरने और भूस्खलन जैसी घटनाओं ने भयानक तबाही मचाई है। इन आपदाओं में अनगिनत लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। सभापति ने विशेष रूप से असम, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, मिजोरम, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों का ज़िक्र किया, जहाँ भारी वर्षा और उससे जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण सामान्य जनजीवन ठप्प हो गया है। आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में भी लोगों की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं।
सभापति ने आगे बताया कि इन प्राकृतिक आपदाओं का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि मकानों, फसलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान हुआ है। सड़कें, पुल, बिजली और संचार व्यवस्था जैसी ज़रूरी सुविधाएं कई जगहों पर ठप्प पड़ गई हैं। इसके अलावा, इन क्षेत्रों की वनस्पति और वन्यजीवों पर भी गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने बताया कि प्रभावित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें भी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही हैं। वे प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश कर रही हैं।

सभापति ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं में कीमती मानव जीवन का नुकसान और लोगों का घायल होना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। ऐसे मुश्किल समय में पूरा सदन शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ा है और उनके प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है। राज्यसभा दिवंगत लोगों के परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना प्रकट करती है। साथ ही, सदन घायलों और आपदा प्रभावित लोगों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ, पुनर्वास और सामान्य जीवन में वापसी की कामना करता है।

इसके बाद, सभापति ने सभी सदस्यों से अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में मौन रखने का अनुरोध किया। सदन के सभी सदस्यों ने खड़े होकर मौन रखा और दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

यह घटना दर्शाती है कि कैसे देश प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है और कैसे सरकारें और संस्थाएं मिलकर लोगों की मदद करने का प्रयास कर रही हैं। राज्यसभा का यह कदम पीड़ितों के प्रति सम्मान और एकजुटता दिखाने का एक महत्वपूर्ण तरीका था। यह याद दिलाता है कि ऐसे समय में हमें एक-दूसरे का साथ देना चाहिए।

आपदाओं का प्रभाव सिर्फ तत्काल नुकसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका दीर्घकालिक असर भी होता है। लोगों को अपने घर, रोज़ी-रोटी और जीवन की सामान्य लय को फिर से बनाने में काफी समय लगता है। ऐसे में सरकारी सहायता और सामुदायिक सहयोग बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि हम आपदाओं से बचाव के उपायों पर भी ध्यान दें। मौसम की भविष्यवाणी, सुरक्षित निर्माण तकनीकें और लोगों को जागरूक करना ऐसी घटनाओं के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। राज्यसभा में उठाया गया यह मुद्दा इन सभी पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करता है।

देश के विभिन्न हिस्सों में हुई इन आपदाओं ने हमें प्रकृति की शक्ति का एहसास कराया है और यह भी दिखाया है कि हमें इसके प्रति अधिक संवेदनशील और तैयार रहने की आवश्यकता है। राज्यसभा का यह मौन सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं था, बल्कि यह एक सामूहिक संकल्प भी था कि हम मिलकर इन मुश्किलों का सामना करेंगे।

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