ईपीएफओ अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, 4 लाख की मांगी थी रिश्वत
ईपीएफओ अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, 4 लाख की मांगी थी रिश्वत
NewsPoint•
नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। यह अधिकारी पटियाला स्थित ईपीएफओ कार्यालय में तैनात था और शिकायतकर्ता, जो एक ईपीएफ कंसल्टेंट है, से उसके क्लाइंट के खिलाफ जांच बंद करने और कम जुर्माना लगाने के बदले 4 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा था। सीबीआई ने जाल बिछाकर 2.5 लाख रुपये लेते हुए उसे गिरफ्तार किया और अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इसी बीच, सीबीआई ने चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के बैंक खातों से सरकारी धन के गबन के मामले में चंडीगढ़ और लुधियाना में कई जगहों पर छापेमारी की है, जिसमें करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप है।
ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी को 22 जुलाई को रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला तब सामने आया जब एक ईपीएफ कंसल्टेंट ने सीबीआई से शिकायत की। कंसल्टेंट के क्लाइंट के खिलाफ ईपीएफओ में कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 7ए के तहत एक जांच चल रही थी। कंसल्टेंट का आरोप है कि उसने सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे, लेकिन ईपीएफओ अधिकारी ने उसके क्लाइंट के खिलाफ भारी आकलन और जुर्माने की सिफारिश वाली प्रतिकूल रिपोर्ट भेजने की धमकी दी।सीबीआई के अनुसार, आरोपी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से फोन पर संपर्क किया और उसे 21 जुलाई को ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ में मिलने के लिए बुलाया। वहां, अधिकारी ने जांच बंद करने और कम से कम जुर्माना लगाने के बदले 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। इसके बाद, सीबीआई ने 22 जुलाई को एक जाल बिछाया और शिकायतकर्ता से 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए आरोपी अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ लिया। सीबीआई ने उसी दिन अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया। 23 जुलाई को उसे चंडीगढ़ की सक्षम अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सीबीआई ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है।
एक अन्य बड़े मामले में, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के बैंक खातों से सरकारी धन के गबन के मामले में कार्रवाई की है। गुरुवार को चंडीगढ़ और लुधियाना में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस छापेमारी में जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं। सीबीआई के अनुसार, कुल पांच स्थानों पर तलाशी ली गई। इनमें गबन की गई राशि के लाभार्थियों के घर और कारोबारी प्रतिष्ठान, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के अधिकारी अनुभव मिश्रा का ठिकाना तथा जांच से जुड़े निजी संस्थानों के परिसर शामिल हैं।
यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। राज्य सरकार के अनुरोध पर बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब 504 करोड़ रुपये सरकारी धन को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट लेनदेन के जरिए निकालकर शेल कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर भेज दिया गया। यह एक बहुत बड़ा घोटाला है जिसमें सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। सीबीआई इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि सभी दोषियों को पकड़ा जा सके और सरकारी धन की वसूली की जा सके।