केरल: पूर्व मंत्री पी.के. श्रीमती के खिलाफ फर्जी प्रचार अभियान पर सीएम सतीशन सख्त, गृह मंत्री को कार्रवाई के निर्देश

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तिरुवनंतपुरम, 24 जुलाई (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति की सदस्य और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री पी.के. श्रीमती के खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाए गए कथित फर्जी प्रचार अभियान पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। श्रीमती ने उनके खिलाफ झूठी खबरें फैलाकर बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को एक औपचारिक शिकायत सौंपी थी। शिकायत में कहा गया था कि सोशल मीडिया और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह झूठा दावा किया गया कि उन्होंने विधायक परिवार पेंशन धोखाधड़ी से प्राप्त की है। मुख्यमंत्री ने शिकायत मिलते ही इसे राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को भेजते हुए मामले में तत्काल और उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। सरकारी हस्तक्षेप के बाद जांच में सामने आया कि यह मामला नाम की समानता के कारण पैदा हुई गलतफहमी का था। जिस पेंशन का जिक्र किया जा रहा था, वह सीपीआई(एम) नेता पी.के. श्रीमती को नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस नेता पी.आर. कृष्णन की दिवंगत पत्नी पी.के. श्रीमती को मिलती थी। पी.आर. कृष्णन पूर्व त्रावणकोर-कोचीन विधानसभा और बाद में कुन्नमकुलम विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे थे। थ्रिसूर के पूचट्टी स्थित ए.के.एम. हायर सेकेंडरी स्कूल की सेवानिवृत्त शिक्षिका रही पी.के. श्रीमती को वर्ष 1993 में अपने पति के निधन के बाद विधानसभा की पारिवारिक पेंशन मिलनी शुरू हुई थी। फरवरी 2020 में उनके निधन के बाद यह पेंशन बंद कर दी गई। उनके बेटे अजीत (प्रिंटेक्स अजीत) ने स्पष्ट किया कि पिछले छह वर्षों से किसी ने भी यह पेंशन प्राप्त नहीं की है। उन्होंने कहा कि उनके पिता का नाम बेवजह विवाद में घसीटा गया और संभव है कि सीपीआई(एम) नेता को या तो नाम समान होने के कारण निशाना बनाया गया या फिर जानबूझकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई। आरटीआई के जवाब को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया यह विवाद पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन से जुड़े आरटीआई के जवाब के बाद शुरू हुआ। दस्तावेज में एक ओर \"पी.के. श्रीमती, पत्नी पी.आर. कृष्णन\" को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन का उल्लेख था, जबकि दूसरी ओर कन्नूर की पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री पी.के. श्रीमती की पेंशन संबंधी अलग जानकारी दर्ज थी। आरोप है कि इन दोनों अलग-अलग प्रविष्टियों को जोड़कर ऐसा दिखाया गया मानो दोनों एक ही व्यक्ति हों, जिसके बाद सोशल मीडिया पर फर्जी अभियान शुरू हो गया। पी.के. श्रीमती गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए भावुक हो गईं और कहा कि बिना किसी गलती के उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि झूठे आरोप फैलाने वालों को वह कभी माफ नहीं करेंगी और उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगी। उन्होंने कहा, \"फर्जी खबर चलाने वाले कई लोगों ने मुझे फोन किया। कुछ ने तो मेरे पैरों पर गिरकर माफी मांगने की बात भी कही।\" श्रीमती ने यह भी बताया कि कांग्रेस और भाजपा के कई नेताओं ने उनसे संपर्क कर इस मामले में अपना समर्थन जताया है। मुख्यमंत्री के सख्त कार्रवाई के निर्देश और संभावित कानूनी कार्रवाई के बाद यह मामला अब केवल फर्जी खबर फैलाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य में फेक न्यूज पर सरकार की कार्रवाई की गंभीरता की भी परीक्षा माना जा रहा है।

केरल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री पी.के. श्रीमती को निशाना बनाया गया है। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक फर्जी प्रचार अभियान चलाया गया, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने विधायक परिवार पेंशन के नाम पर धोखाधड़ी की है। इस मामले में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
पी.के. श्रीमती ने खुद मुख्यमंत्री को एक शिकायत सौंपी थी। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। शिकायत में साफ तौर पर कहा गया था कि सोशल मीडिया और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह झूठा प्रचार किया जा रहा है कि उन्होंने विधायक परिवार पेंशन के ज़रिए पैसे हड़पे हैं।

मुख्यमंत्री ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया। उन्होंने तुरंत इसे राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को भेज दिया और मामले में जल्द से जल्द और सही कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

सरकारी हस्तक्षेप के बाद जब जांच हुई, तो पता चला कि यह पूरा मामला एक गलतफहमी का नतीजा था। यह गलतफहमी नाम की समानता के कारण हुई थी। जिस पेंशन की बात की जा रही थी, वह सीपीआई(एम) नेता पी.के. श्रीमती को नहीं, बल्कि किसी और पी.के. श्रीमती को मिलती थी।

यह दूसरी पी.के. श्रीमती स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस नेता पी.आर. कृष्णन की दिवंगत पत्नी थीं। पी.आर. कृष्णन खुद भी एक विधायक रह चुके थे। वह पहले त्रावणकोर-कोचीन विधानसभा के सदस्य थे और बाद में कुन्नमकुलम विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे।

थ्रिसूर के पूचट्टी में रहने वाली पी.के. श्रीमती, जो ए.के.एम. हायर सेकेंडरी स्कूल में एक सेवानिवृत्त शिक्षिका थीं, को अपने पति पी.आर. कृष्णन के निधन के बाद, साल 1993 से विधानसभा की पारिवारिक पेंशन मिलनी शुरू हुई थी। फरवरी 2020 में जब उनका निधन हुआ, तो यह पेंशन बंद कर दी गई।

पी.के. श्रीमती के बेटे अजीत (जिन्हें प्रिंटेक्स अजीत के नाम से भी जाना जाता है) ने इस मामले पर सफाई दी। उन्होंने बताया कि पिछले छह सालों से किसी ने भी यह पेंशन प्राप्त नहीं की है। अजीत ने यह भी कहा कि उनके पिता का नाम बेवजह इस विवाद में घसीटा गया है। उन्होंने आशंका जताई कि या तो सीपीआई(एम) नेता पी.के. श्रीमती को उनके नाम की समानता के कारण निशाना बनाया गया, या फिर जानबूझकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन से संबंधित एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जवाब को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। आरटीआई के दस्तावेज में एक तरफ \"पी.के. श्रीमती, पत्नी पी.आर. कृष्णन\" को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन का ज़िक्र था। वहीं दूसरी तरफ, कन्नूर की पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री पी.के. श्रीमती की पेंशन से जुड़ी अलग जानकारी दर्ज थी।

आरोप है कि इन दोनों अलग-अलग जानकारियों को इस तरह से जोड़ा गया कि यह लगे कि दोनों एक ही व्यक्ति हैं। इसी के बाद सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाने का अभियान शुरू हो गया।

गुरुवार को जब पी.के. श्रीमती मीडिया से बात कर रही थीं, तो वह काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उन्हें बिना किसी गलती के निशाना बनाया जा रहा है। शुक्रवार को उन्होंने साफ कहा कि झूठे आरोप फैलाने वालों को वह कभी माफ नहीं करेंगी और उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि फर्जी खबर चलाने वाले कई लोगों ने उन्हें फोन किया था। कुछ लोगों ने तो माफी मांगने के लिए उनके पैरों पर गिरने की बात भी कही।

श्रीमती ने यह भी बताया कि इस मामले में कांग्रेस और भाजपा के कई नेताओं ने उनसे संपर्क किया है और उन्हें अपना समर्थन जताया है।

मुख्यमंत्री द्वारा सख्त कार्रवाई के निर्देश और संभावित कानूनी कार्रवाई के बाद, यह मामला अब सिर्फ फर्जी खबर फैलाने तक सीमित नहीं रह गया है। इसे राज्य में फेक न्यूज (फर्जी खबरें) के खिलाफ सरकार की कार्रवाई की गंभीरता की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। यह घटना दर्शाती है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली गलत सूचनाएं कितनी गंभीर समस्या बन सकती हैं और सरकार ऐसे मामलों से कैसे निपटती है।

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