कैबिनेट ने भव्या-रसायन योजना को मंजूरी दी: 3030 करोड़ से बनेंगे 3 केमिकल पार्क

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नई दिल्ली, 24 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए 'भव्या-रसायन योजना' को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत देश भर में तीन बड़े केमिकल पार्क बनाए जाएंगे, जिससे भारतीय रसायन उद्योग को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। इस योजना का ऐलान केंद्रीय बजट 2026-27 में ही किया गया था और अब इसे पांच साल, यानी वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए लागू किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें से 3,000 करोड़ रुपये पार्क के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं बनाने पर खर्च होंगे, जबकि 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक कामों के लिए रखे गए हैं।

इस योजना के तहत, केंद्र सरकार हर केमिकल पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपये तक की आर्थिक मदद देगी। हालांकि, इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों को भी कम से कम 500 करोड़ रुपये का योगदान देना होगा। सरकार का मानना है कि इस 'भव्या-रसायन योजना' से देश की अर्थव्यवस्था को कई तरह से फायदा होगा। यह योजना रसायन उद्योग की पूरी वैल्यू चेन, जिसमें कच्चा माल बनाने वाली कंपनियां, तैयार माल बनाने वाली कंपनियां और उनसे जुड़ी सहायक कंपनियां शामिल हैं, के विकास को बढ़ावा देगी। इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और सामान लाने-ले जाने (लॉजिस्टिक्स) का खर्च भी कम होगा।
रसायन उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, इस योजना में साझा कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं और बुनियादी यूटिलिटीज (जैसे बिजली, पानी) बनाई जाएंगी। इससे कंपनियों को लागत कम करने में मदद मिलेगी और भारतीय उद्योग वैश्विक स्तर पर और भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। यह योजना भारतीय केमिकल इंडस्ट्री को दुनिया की सप्लाई चेन से बेहतर तरीके से जुड़ने में भी मदद करेगी, जिससे निर्यात बढ़ेगा और हम दूसरे देशों से कम सामान मंगाएंगे।

इसके अलावा, 'भव्या-रसायन योजना' एक पर्यावरण-अनुकूल माहौल बनाने पर भी जोर देगी, जिससे भारतीय केमिकल इंडस्ट्री का टिकाऊ विकास हो सके। इस माहौल में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (साझा गंदा पानी साफ करने का प्लांट), ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोजल फैसिलिटी (इलाज, भंडारण और निपटान की सुविधा) और खतरनाक कचरा प्रबंधन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सेंट्रलाइज्ड सुविधाएं शामिल होंगी। इससे पर्यावरण के नियमों का पालन करना आसान होगा और इंडस्ट्री का विकास पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना हो सकेगा।

रसायन क्षेत्र के विकास से अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों, जैसे कि खेती, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां), न्यूट्रास्यूटिकल्स (पोषण संबंधी उत्पाद), कंस्ट्रक्शन (निर्माण), ऑटोमोबाइल (गाड़ियां) और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों को भी फायदा होगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था का विकास और तेज होगा। यह सब 'विकसित इंडिया 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कैबिनेट के मुताबिक, यह क्षेत्र ऐसे केमिकल और पेट्रोकेमिकल बनाता है जिनका इस्तेमाल कई उद्योगों में होता है। 'भव्या-रसायन योजना' शुरू होने से देश में और विदेश से निवेश आएगा। साथ ही, देश में उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी, लोगों को रोजगार मिलेगा और इस क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। इससे इस सेक्टर की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ेगी और 'आत्मनिर्भरता' को बढ़ावा मिलेगा।

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