20,149 जन औषधि केंद्र खुले, 45,000 करोड़ की बचत: जानें पूरी योजना
20,149 जन औषधि केंद्र खुले, 45,000 करोड़ की बचत: जानें पूरी योजना
NewsPoint•
नई दिल्ली, 24 जुलाई। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि देश भर में अब तक 20,149 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना (PMBJP) के माध्यम से लोगों ने अब तक करीब 45,000 करोड़ रुपये की बचत की है। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में इस योजना के तहत लोगों ने ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 45,000 करोड़ रुपये बचाए हैं। इससे परिवारों का दवाओं पर होने वाला खर्च काफी कम हुआ है।
PMBJP के तहत 2,110 तरह की दवाएं और 315 तरह के सर्जिकल सामान, चिकित्सा उपयोग की वस्तुएं और उपकरण उपलब्ध हैं। इन दवाओं में हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी और पेट से जुड़ी बीमारियों की दवाएं शामिल हैं। साथ ही, पोषक पूरक (न्यूट्रास्यूटिकल्स) भी उपलब्ध हैं। यह योजना देश के 784 में से 776 जिलों में लागू है। ‘राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची’ में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं, लैब रिएजेंट और वैक्सीन को छोड़कर, इस योजना के तहत उपलब्ध हैं।योजना के तहत जन औषधि केंद्रों को आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली 200 दवाओं का स्टॉक रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा मांग वाली 100 दवाएं और बाजार में तेजी से बिकने वाली 100 दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने वाले जन औषधि केंद्र संचालकों को हर महीने प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
PMBJP योजना को लागू करने वाली एजेंसी ‘फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया’ (PMBI) है। यह एजेंसी जन औषधि केंद्रों के बिक्री प्रदर्शन के आधार पर लगातार उनका मूल्यांकन करती है। बयान के अनुसार, योजना की समीक्षा और इसके बेहतर संचालन से पता चलता है कि PMBJP ने जन औषधि केंद्रों के बढ़ते नेटवर्क के जरिए देशभर में सस्ती और अच्छी गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सुधार किया है।
दवाओं की कमी न हो और देशभर में जरूरी दवाएं आसानी से उपलब्ध रहें, इसके लिए लगातार निगरानी की जाती है और जरूरी कदम उठाए जाते हैं। PMBI, जन औषधि केंद्रों (JAK) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं की पहुंच और बिक्री बढ़ाने के लिए केंद्रीय संचार ब्यूरो, पत्र सूचना कार्यालय (PIB), मायगॉव और माय इंडिया जैसे संस्थानों व मंचों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाता है।
यह योजना आम आदमी को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के सरकार के बड़े लक्ष्य का हिस्सा है। जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी सस्ती होती हैं, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलती है। इन केंद्रों पर न केवल दवाएं, बल्कि कुछ जरूरी चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे लोगों को एक ही जगह पर अपनी जरूरत का सामान मिल जाता है।
सरकार का उद्देश्य है कि देश के हर कोने में, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में, लोगों को आसानी से सस्ती दवाएं मिल सकें। इसी को ध्यान में रखते हुए जन औषधि केंद्रों का नेटवर्क लगातार बढ़ाया जा रहा है। इन केंद्रों के संचालकों को भी प्रोत्साहित किया जाता है ताकि वे दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखें और लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
PMBI द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान भी लोगों को इन केंद्रों के बारे में जानकारी देने और उन्हें इनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से लोगों को यह बताया जाता है कि जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध दवाएं भी उतनी ही प्रभावी और सुरक्षित होती हैं जितनी कि ब्रांडेड दवाएं, लेकिन वे काफी कम कीमत पर मिलती हैं।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना एक सफल योजना साबित हुई है, जिसने लाखों लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने में मदद की है और उनके पैसे बचाए हैं। सरकार इस योजना को और बेहतर बनाने और इसका विस्तार करने के लिए लगातार प्रयासरत है।