Sms अस्पताल में महिला डॉक्टर ने प्रशासनिक अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, जांच समिति गठित
SMS अस्पताल में महिला डॉक्टर ने प्रशासनिक अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, जांच समिति गठित
NewsPoint•
जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में एक महिला डॉक्टर ने एक प्रशासनिक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉक्टर का कहना है कि उन्हें कार्यस्थल पर लगातार परेशान किया जा रहा है, उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार हो रहा है और झूठे आरोप लगाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और अस्पताल अधीक्षक को लिखित शिकायत भेजकर इस मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। इस शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन ने तीन वरिष्ठ डॉक्टरों की एक जांच समिति बनाई है, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई है, जिससे शिकायतकर्ता डॉक्टर नाराज हैं।
महिला डॉक्टर ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि नौकरी के दौरान उन्हें लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उनके साथ जानबूझकर बुरा बर्ताव करते हैं। बिना किसी पुख्ता सबूत के झूठे आरोप लगाकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने की कोशिश की जा रही है। डॉक्टर ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और जो भी दोषी है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने अपनी शिकायत की एक कॉपी मुख्यमंत्री कार्यालय और अस्पताल प्रशासन को भी भेजी है।इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब जिस प्रशासनिक अधिकारी पर आरोप लगे थे, उन्होंने भी महिला डॉक्टर और एक अन्य महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। इस दोहरे आरोप-प्रत्यारोप के बाद अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का फैसला किया। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत तीन वरिष्ठ प्रोफेसरों की एक जांच समिति का गठन किया। उन्होंने समिति को तीन दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।
जांच के लिए बनाई गई इस तीन सदस्यीय समिति में अस्पताल के तीन अनुभवी चिकित्सक शामिल हैं। इनमें न्यूरोसर्जरी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राशिम कटारिया, सर्जरी विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. प्रभा ओम और न्यूरोलॉजी विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. भावना शर्मा हैं। इस समिति का काम दोनों पक्षों के बयान लेना, सभी तथ्यों की जांच करना और फिर अस्पताल प्रशासन को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपना है।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने समिति को तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन शिकायत दर्ज हुए करीब 15 दिन बीत चुके हैं और अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने में हो रही देरी की वजह से मामले का निपटारा नहीं हो पा रहा है, जिससे शिकायत करने वाली डॉक्टर काफी नाराज हैं। उन्होंने कहा है कि कार्यस्थल पर हर किसी को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि मामले की जल्द से जल्द और निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले।
वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया अभी चल रही है। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति की रिपोर्ट क्या आती है और अस्पताल प्रशासन इस पर क्या फैसला लेता है। यह पूरा मामला अस्पताल के अंदरूनी कामकाज और कर्मचारियों के बीच संबंधों पर सवाल खड़े कर रहा है।