पाकिस्तान में मानसून का कहर: 107 की मौत, 344 घायल, 447 घर क्षतिग्रस्त

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पाकिस्तान में मानसून का कहर जारी है। पिछले एक महीने से हो रही भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा दी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के मुताबिक, 26 जून से अब तक 107 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 344 लोग घायल हुए हैं। 447 घर तबाह हो गए हैं और 269 पशुओं की मौत हो गई है। पिछले 24 घंटों में ही पंजाब, सिंध और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे इलाकों में कई लोगों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं। एनडीएमए ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

यह भयानक मंजर सिर्फ बारिश की वजह से नहीं है। डूबने और इमारतों के गिरने से लोगों की मौत हो रही है। वहीं, छत गिरने और बिजली का करंट लगने से लोग घायल हो रहे हैं। लाहौर में छत गिरने की चार अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की जान चली गई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था। पांच लोग घायल हुए। पंजाब के कसूर जिले में भी एक घर की छत गिरने से एक पुरुष और एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। फैसलाबाद में भी छत गिरने से एक महिला की मौत हुई। गुजरांवाला में तो खेतों में जमा बारिश के पानी में डूबने से एक बच्चे की जान चली गई।
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) में तो हालात और भी गंभीर हैं। लगातार चौथे दिन भी कई इलाकों का सड़क संपर्क कटा हुआ है। अचानक आई बाढ़ और ग्लेशियर फटने से सड़कें टूट गई हैं। इससे राहत और मरम्मत के काम में भारी दिक्कत आ रही है। हजारों लोग और पर्यटक फंसे हुए हैं क्योंकि कई घाटियों तक पहुंचना नामुमकिन हो गया है। बाढ़ से प्रभावित इलाकों में पीने के पानी, बिजली और संचार सेवाओं की भी भारी कमी हो गई है।

पीओजीबी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के महानिदेशक अताउर रहमान काकर ने बताया कि 18 से 21 जुलाई के बीच गिलगित-बाल्टिस्तान में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इस वजह से ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघले। इसी का नतीजा है कि कई जगहों पर ग्लेशियर फटने की घटनाएं हुईं और बाढ़ आ गई। यह सब मानसून की मार और बढ़ते तापमान का मिलाजुला असर है।

एनडीएमए ने लोगों से, खासकर उन लोगों से जो कमजोर और जोखिम वाले इलाकों में रहते हैं, अपील की है कि वे बहुत सतर्क रहें। मानसून की बारिश अभी जारी है। इसलिए, अधिकारियों द्वारा जारी किए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन करना बहुत जरूरी है। यह समय है कि हम सब मिलकर इस मुश्किल घड़ी का सामना करें और एक-दूसरे की मदद करें।

यह समझना भी जरूरी है कि ये मौतें और नुकसान सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं हैं, बल्कि ये जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर का भी संकेत हैं। जिस तरह से तापमान बढ़ रहा है और मौसम में अप्रत्याशित बदलाव आ रहे हैं, उससे भविष्य में ऐसी घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है। इसलिए, हमें न सिर्फ तत्काल राहत पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि भविष्य के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती है। सरकार और स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुटे हुए हैं, लेकिन नुकसान इतना ज्यादा है कि मदद की जरूरत हर तरफ है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और जरूरी सामान मुहैया कराने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, फंसे हुए लोगों तक पहुंचना और उन्हें बचाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने हम कितने छोटे हैं। हमें उसके साथ तालमेल बिठाकर चलना सीखना होगा। तभी हम ऐसी आपदाओं से बच सकते हैं या कम से कम उनके असर को कम कर सकते हैं।

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