मद्रास हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमलों से निपटने के लिए तमिलनाडु और पुडुचेरी सरकारों से मांगी रिपोर्ट

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Navbharat Times
चेन्नई, 22 जून: मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु और पुडुचेरी सरकारों से आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और लोगों पर उनके हमलों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है, खासकर स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर तुरंत ध्यान देने पर जोर दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है जिसमें सभी हाई कोर्ट्स को आवारा कुत्तों के प्रबंधन के उपायों के पालन की निगरानी करने के लिए कहा गया था।

चीफ जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने सोमवार को यह निर्देश दिया। कोर्ट ने दोनों प्रशासनों के विभागों से अब तक हुई प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 19 मई, 2026 के उस आदेश के बाद शुरू हुआ है, जिसमें सभी हाई कोर्ट्स को 'सुओ मोटो' रिट याचिकाएं दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इन याचिकाओं का मकसद सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों के पालन की निगरानी करना था।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही चेतावनी दी थी कि आदेशों को लागू करने में विफल रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का भी निर्देश दिया था। इसका मतलब है कि कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने और रेबीज जैसी बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह से काम करने वाला 'एनिमल बर्थ कंट्रोल' (एबीसी) सेंटर होना चाहिए। ये सेंटर आवारा कुत्तों की नसबंदी करने में मदद करते हैं, जिससे उनकी आबादी अनियंत्रित रूप से नहीं बढ़ती। सरकारों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों। ये दवाएं रेबीज के संक्रमण से बचाने के लिए बहुत जरूरी हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु और पुडुचेरी में इन निर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक 'सुओ मोटो' मामला दर्ज किया है। 'सुओ मोटो' का मतलब है कि कोर्ट ने खुद ही इस मामले पर संज्ञान लिया है, यानी किसी की शिकायत का इंतजार नहीं किया। मुख्य सचिवों और पशुपालन, स्वास्थ्य, नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभागों के सचिवों सहित वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। कोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह मामला आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाले हमलों की घटनाओं को लेकर चिंता का विषय है। लोग अक्सर आवारा कुत्तों के डर से बाहर निकलने में हिचकिचाते हैं, खासकर बच्चे। कोर्ट का यह कदम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कोर्ट ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए। इन जगहों पर बच्चों और मरीजों की सुरक्षा सबसे ज्यादा मायने रखती है। आवारा कुत्तों को इन जगहों से हटाना एक प्राथमिकता है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।

अगली सुनवाई 21 जुलाई के लिए टाल दी गई है। उम्मीद है कि इस सुनवाई तक सरकारें अपनी रिपोर्ट पेश करेंगी और कोर्ट को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराएंगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कितना प्रभावी ढंग से पालन करती हैं और नागरिकों को आवारा कुत्तों के हमलों से बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं। यह मामला न केवल तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है कि कैसे आवारा पशुओं की समस्या का समाधान किया जाए।

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