आंध्र प्रदेश सरकार ने 15% विकास दर के लिए आईएफएमआर के साथ किया समझौता, स्वर्णांध्र विजन 2047 पर काम शुरू

NewsPoint
15 2047
आंध्र प्रदेश सरकार ने 'स्वर्णांध्र विजन 2047' के तहत 15 प्रतिशत विकास दर हासिल करने के लिए इंस्टिट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट एंड रिसर्च (आईएफएमआर) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है. यह समझौता राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की मौजूदगी में राज्य योजना विभाग और आईएफएमआर के बीच हुआ. इस डील का मुख्य मकसद राज्य की आर्थिक तरक्की को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है, जिसके लिए 10 प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित कार्यक्रमों को लागू किया जाएगा.

मुख्यमंत्री नायडू ने इस मौके पर कहा कि 'स्वर्णांध्र विजन 2047' का लक्ष्य 15 प्रतिशत की विकास दर हासिल करना है. उन्होंने बताया कि 2014 से 2019 के बीच राज्य ने 13.5 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की थी, लेकिन कुछ कारणों से वर्तमान विकास दर लगभग 11 प्रतिशत रह गई है. इस समझौते के ज़रिए, आईएफएमआर इन 10 सिद्धांतों पर आधारित कार्यक्रमों के कार्यान्वयन और 'मिशन सेल्स' की स्थापना की निगरानी करेगा. इसका सीधा असर राज्य के जीएसडीपी (ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट) और विकास दर को बढ़ाने पर पड़ेगा.
राज्य योजना विभाग के प्रमुख सचिव पियूष कुमार और आईएफएमआर की ओर से कपिल विश्वनाथन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. आईएफएमआर राज्य सरकार के साथ मिलकर जीरो पॉवर्टी मिशन, वॉटर सिक्योरिटी और डीप टेक मिशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर काम करेगा. इन कार्यक्रमों में फील्ड स्टडी, नीतिगत सुझाव और नए इनोवेशन (नवाचार) शामिल होंगे. इसके अलावा, राज्य स्तर पर एक समिति के साथ-साथ 'मिशन वर्किंग ग्रुप्स' भी बनाए जाएंगे, जो इस 10 सूत्रीय एजेंडे को ज़मीनी स्तर पर लागू करने का काम करेंगे.

मुख्यमंत्री नायडू ने इस बात पर ज़ोर दिया कि राज्य में विकास के लिए डीप टेक्नोलॉजी (गहरी तकनीक) को तेज़ी से अपनाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश में एआई स्किलिंग (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कौशल विकास), ड्रोन मैपिंग, ऑटोमोबाइल, मेटल, स्टील, रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ पृथ्वी खनिज), सेमीकंडक्टर और डिफेंस (रक्षा) जैसे क्षेत्रों में कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है.

इस कार्यक्रम में वित्त मंत्री पय्यावुला केशव, केआरईए और आईएफएमआर के प्रतिनिधि, तथा योजना विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे. यह समझौता आंध्र प्रदेश को आर्थिक रूप से और मज़बूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इन पहलों के ज़रिए प्रदेश को विकास के पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ाया जाए और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाया जाए. डीप टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके राज्य की अर्थव्यवस्था को और भी मज़बूत बनाने की योजना है.

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