ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीद जवानों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल पर अंकित होंगे
ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीद जवानों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल पर अंकित होंगे
NewsPoint•
नई दिल्ली, 26 जून। भारतीय सेना ने पिछले साल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान में छिपे आतंकवादियों के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। इस सफल ऑपरेशन में भारतीय सेना के 6 वीर जवानों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। इन वीर शहीदों के नाम अब नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर अंकित किए जाएंगे। इन सभी 6 शहीदों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल में ग्रेनाइट की ईंट पर लिखे जाएंगे। नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर इन शहीदों के नाम सार्वजनिक कर दिए गए हैं। इन शहीदों में भारतीय सेना के 5 जवान और भारतीय वायुसेना का एक सार्जेंट शामिल हैं। सरकार ने दो शहीदों को उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित भी किया है। इनमें राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को मरणोपरांत वायु पदक से सम्मानित किया गया है।
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद होने वाले वीर सैनिकों में सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरली नाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। इनमें से पांच जवान भारतीय सेना से थे और एक जवान भारतीय वायुसेना से संबंधित था। देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन सभी छह वीर जवानों के नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक कर दिए गए हैं। शहीदों के नाम नई राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित किए जा रहे हैं, ताकि उनका बलिदान हमेशा राष्ट्र की यादों में जीवित रहे। इन छह शहीदों में से दो को उनकी असाधारण वीरता के लिए सैन्य सम्मान भी दिए गए हैं।राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह देश का तीसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। वहीं, सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु पदक प्रदान किया गया। जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान राइफलमैन सुनील कुमार नियंत्रण रेखा पर तैनात थे। कर्तव्य निभाते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। 8 जून को आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके माता-पिता सुदेश कुमारी और यश पाल ने ग्रहण किया।
ऑपरेशन सिंदूर के इन वीरों के नाम उन सभी सैनिकों की सूची के साथ सार्वजनिक किए गए हैं, जिन्होंने वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न सैन्य अभियानों में अपने प्राणों की आहुति दी थी। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का 'त्याग चक्र' देश के शहीदों को समर्पित है। इसमें ग्रेनाइट की 16 गोल दीवारें हैं। इन दीवारों की हर ईंट पर स्वतंत्रता के बाद देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम, पद और यूनिट अंकित किए जाते हैं। अब ऑपरेशन सिंदूर के इन छह वीर सपूतों के नाम भी इस गौरवशाली स्मारक का एक स्थायी हिस्सा बनेंगे।
देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर जवानों का बलिदान हमेशा राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। भारत उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च समर्पण को श्रद्धापूर्वक नमन करता है।
ऑपरेशन सिंदूर एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान था। इसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान में छिपे आतंकवादियों के खिलाफ चलाया गया था। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करना और देश की सुरक्षा को मजबूत करना था। ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के वीर जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने दुश्मन का सामना करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। इन वीर जवानों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
नेशनल वॉर मेमोरियल देश के उन सभी वीर जवानों को समर्पित है, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह स्मारक हमारे वीर शहीदों की गाथा कहता है। यहां हर शहीद के नाम को ग्रेनाइट की ईंट पर अंकित किया जाता है। यह उन वीर आत्माओं को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों के नाम भी अब इस स्मारक का हिस्सा बनेंगे। यह उनके बलिदान को हमेशा याद रखने का एक तरीका है।
वीर चक्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। यह उन सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने युद्ध के दौरान असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया हो। राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह उनके अदम्य साहस और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है। वायु पदक भारतीय वायुसेना के वीर जवानों को दिया जाता है। सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को भी मरणोपरांत वायु पदक से सम्मानित किया गया। यह उनके शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान है।
यह ऑपरेशन उन वीर जवानों की बहादुरी और बलिदान की कहानी कहता है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। उनके नाम हमेशा अमर रहेंगे। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को भी देश सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। इन वीर सपूतों का बलिदान राष्ट्र के लिए एक अनमोल धरोहर है।