NASA की चेतावनी: अल नीनो का खतरा बढ़ा, केल्विन वेव से बिगड़ेगा वैश्विक मौसम

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नासा के उपग्रह ने समुद्र में एक बड़ी हलचल दर्ज की है। यह 'केल्विन वेव' आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम को बिगाड़ सकती है। दक्षिण अमेरिका के तटों के पास समुद्र का जलस्तर बढ़ा है। यह इस साल के अंत तक खतरनाक 'अल नीनो' की शुरुआत का संकेत है।

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दुनिया भर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच, अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। NASA के Sentinel-6 Michael Freilich उपग्रह ने समुद्र की गहराइयों में ऐसी हलचल दर्ज की है, जो आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम को बिगाड़ सकती है। यह हलचल दक्षिण अमेरिका के तटों के पास समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी के रूप में देखी गई है, जो पानी के तेजी से गर्म होने का संकेत है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह 'केल्विन वेव' नामक गर्म पानी की लहर इस साल के अंत तक खतरनाक 'अल नीनो' (El Niño) चक्र की शुरुआत कर सकती है, जिससे सूखे, भीषण गर्मी और बेमौसम बारिश जैसी आपदाएं आ सकती हैं।

NASA का Sentinel-6 Michael Freilich उपग्रह, जिसे 2020 में लॉन्च किया गया था, हर 10 दिन में समुद्र के वैश्विक जलस्तर को बहुत सटीकता से मापता है। 'अल नीनो' की स्थिति में, यह उपग्रह 'वार्म केल्विन वेव्स' (गर्म केल्विन लहरें) पर नज़र रखता है। ये लहरें समुद्र के भीतर 'अल नीनो' को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आमतौर पर, प्रशांत महासागर के ऊपर पूरब से पश्चिम की ओर चलने वाली 'पूर्वी हवाएं' (easterly winds) जब कमजोर पड़ जाती हैं, तो उनकी जगह 'पश्चिमी हवाएं' (westerly winds) ले लेती हैं। हवाओं की दिशा में इस बदलाव से पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र का गर्म पानी पूरब की ओर बहने लगता है।
वैज्ञानिकों द्वारा 'केल्विन वेव' के नाम से जानी जाने वाली यह गर्म पानी की लहर इस बात का सीधा संकेत है कि इस साल के अंत तक, दुनिया एक बार फिर खतरनाक 'अल नीनो' चक्र की चपेट में आ सकती है। 'अल नीनो' की यह घटना कई देशों में सूखे, भीषण गर्मी और बेमौसम मूसलाधार बारिश जैसी आपदाओं का एक खतरनाक सिलसिला शुरू कर सकती है।

NASA की 'जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी' में समुद्र की सतह के वैज्ञानिक और इस उपग्रह परियोजना से जुड़े शोधकर्ता जोश विलिस ने बताया कि इस साल के 'अल नीनो' की शुरुआत, वर्ष 2015 और 1997 में आई 'अल नीनो' की बड़ी घटनाओं की तुलना में थोड़ी देर से हुई है; लेकिन अब यह धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अब हमें इंतज़ार करना होगा और देखना होगा कि यह आखिरकार कितना बड़ा रूप लेता है।

Sentinel-6 Michael Freilich सैटेलाइट से मिले डेटा से पता चला कि जनवरी के आखिर में माइक्रोनेशिया के पास एक छोटी केल्विन लहर बनी, जो फरवरी के मध्य तक खत्म हो गई। फिर, मार्च की शुरुआत में एक नई लहर बनी और धीरे-धीरे पूरब की ओर फैल गई। मई के मध्य तक, पेरू के तट पर समुद्र का जलस्तर, लंबे समय के औसत से 5.9 इंच (15 सेंटीमीटर) से ज़्यादा बढ़ गया था।

जब कई महीनों तक, ये 'केल्विन लहरें'—एक के बाद एक—कोलंबिया, इक्वाडोर और पेरू के तटों के पास गर्म पानी जमा करती रहती हैं, तो 'अल नीनो' पूरी तरह से सक्रिय हो जाता है। 'अल नीनो' एक ऐसी जलवायु घटना है जो हर कुछ सालों में होती है। इसमें प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है।

'अल नीनो' के कारण कई जगहों पर सूखा पड़ सकता है, जबकि कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। भारत जैसे देशों में, 'अल नीनो' अक्सर मानसून को कमजोर कर सकता है, जिससे सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं, कुछ अन्य क्षेत्रों में, यह अत्यधिक वर्षा और बाढ़ का कारण बन सकता है।

NASA का Sentinel-6 Michael Freilich उपग्रह समुद्र के जलस्तर को एक इंच के भी बहुत छोटे हिस्से (अंश) तक की सटीकता के साथ मापने में सक्षम है। यह उपग्रह समुद्र के तापमान और जलस्तर में होने वाले छोटे से छोटे बदलावों को भी पकड़ लेता है। यह जानकारी वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन और मौसम की घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।

'अल नीनो' की शुरुआत में 'केल्विन वेव्स' की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। ये लहरें समुद्र के नीचे से गर्म पानी को सतह पर लाती हैं, जिससे समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है। जब यह गर्म पानी प्रशांत महासागर के एक बड़े हिस्से में फैल जाता है, तो 'अल नीनो' की स्थिति बन जाती है।

इस बार 'अल नीनो' के देर से आने के बावजूद, इसके मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिकों की चिंता यह है कि अगर यह 'अल नीनो' बहुत शक्तिशाली हुआ, तो इसके परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। दुनिया भर के देशों को इस संभावित जलवायु परिवर्तन के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि 'अल नीनो' सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक प्रभाव पड़ता है। यह कृषि, जल संसाधनों, और मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए, NASA जैसी संस्थाओं द्वारा जारी की गई चेतावनियों पर ध्यान देना और आवश्यक कदम उठाना बहुत जरूरी है।

इस बार 'अल नीनो' कितना गंभीर होगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन, Sentinel-6 Michael Freilich उपग्रह से मिले शुरुआती संकेत चिंताजनक हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पहले से तैयारी की जा सके।

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