Rbi का बड़ा फैसला: ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजिटल लेन देन पर एक घंटे की देरी, बैंक चिंतित
RBI का बड़ा फैसला: ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजिटल लेन-देन पर एक घंटे की देरी, बैंक चिंतित
NewsPoint•
भारतीय रिज़र्व बैंक ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए बड़े डिजिटल लेन-देन पर एक घंटे की देरी का प्रस्ताव लाया है। बैंक ₹10,000 की सीमा को ₹25,000 करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे यूपीआई जैसे भुगतान सिस्टम की गति प्रभावित होगी। भारत में डिजिटल धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए बड़े डिजिटल लेन-देन पर एक घंटे की देरी लागू करने का प्रस्ताव लेकर आया है। इस प्रस्ताव पर कई बैंकों ने चिंता जताई है, उनका कहना है कि ₹10,000 की सीमा बहुत कम है और इसे बढ़ाकर ₹25,000 किया जाना चाहिए। बैंकों का मानना है कि इस देरी से UPI जैसे ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम की रफ्तार धीमी हो जाएगी। RBI ने साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए चार मुख्य सिफ़ारिशें पेश की हैं, जिनमें बड़े लेन-देन पर देरी, अतिरिक्त सुरक्षा जाँच, भरोसेमंद खातों तक सीमित ट्रांसफर और ग्राहकों को ज़्यादा नियंत्रण देना शामिल है। भारत में डिजिटल धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, 2025 में यह संख्या 2.8 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान है, जिसमें करोड़ों रुपये का घालमेल हो रहा है।
RBI ने हाल ही में एक चर्चा पत्र जारी किया है, जिसमें ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों में सबसे अहम है कि ₹10,000 से ज़्यादा के बड़े डिजिटल लेन-देन पर एक घंटे की देरी लागू की जाए। इसका मकसद यह है कि अगर कोई धोखाधड़ी होती है, तो लेन-देन को रोकने या रद्द करने के लिए समय मिल सके। इसके अलावा, ज़्यादा रकम वाले लेन-देन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा जाँच की जाए और ऐसे ट्रांसफर केवल भरोसेमंद खातों तक ही सीमित रखे जाएँ। RBI ग्राहकों को भी उनके बड़े डिजिटल लेन-देन पर ज़्यादा नियंत्रण देना चाहता है, ताकि वे खुद धोखाधड़ी से बच सकें।हालांकि, RBI के इस प्रस्ताव पर कई बैंकों ने अपनी आपत्ति जताई है। बैंकों का कहना है कि ₹10,000 की सीमा बहुत कम है। एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम ₹25,000 किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि ₹10,000 से ज़्यादा के लेन-देन पर एक घंटे की देरी लागू करने से UPI और अन्य ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम की गति और कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। सोचिए, अगर आपको तुरंत कोई पेमेंट करना हो और वह एक घंटे के लिए अटक जाए, तो कितनी परेशानी होगी।
बैंकों ने यह भी कहा है कि आपातकालीन भुगतानों और टैक्स से जुड़े लेन-देन को इस नियम से छूट मिलनी चाहिए। यानी, अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी हो या टैक्स भरने की आखिरी तारीख हो, तो ऐसे ज़रूरी भुगतानों में देरी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, "किल स्विच" जैसी सुविधाओं को लागू करना छोटे बैंकों या सीमित तकनीकी क्षमताओं वाले बैंकों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। "किल स्विच" एक तरह का इमरजेंसी बटन होता है, जिसे दबाकर सिस्टम को तुरंत रोका जा सकता है।
RBI की घोषणा के बाद, पेमेंट उद्योग से जुड़े लोगों ने भी कुछ चिंताएँ जताई हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि ₹25 लाख से ज़्यादा की रकम पाने वाले खातों के लिए अलग से सत्यापन (verification) ज़रूरी करने का नियम व्यावहारिक नहीं है। उनका दावा है कि धोखेबाज़ कई छोटे खातों का इस्तेमाल करके इस नियम को आसानी से चकमा दे सकते हैं। यानी, वे एक बड़ी रकम को कई छोटी-छोटी रकमों में बाँटकर धोखाधड़ी कर सकते हैं।
भारत में डिजिटल धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2025 में, डिजिटल धोखाधड़ी के लगभग 2.8 मिलियन मामले सामने आने का अनुमान है, जो 2024 के 2.4 मिलियन मामलों से ज़्यादा है। साथ ही, इन धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल कुल मौद्रिक मूल्य बढ़कर लगभग ₹22,931 करोड़ हो गया है। यह एक बहुत बड़ी रकम है और इससे पता चलता है कि ऑनलाइन सुरक्षा कितनी ज़रूरी है। RBI इन बढ़ते मामलों को रोकने के लिए ही ये नए उपाय ला रहा है।