सपा प्रमुख अखिलेश यादव के घुसपैठियों वाले बयान पर सोनम बगवाड़ी का स्पष्टीकरण
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के घुसपैठियों वाले बयान पर सोनम बगवाड़ी का स्पष्टीकरण
NewsPoint•
हरिद्वार, 25 अक्टूबर। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में घुसपैठियों पर एक बयान दिया, जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पर सपा ने सफाई दी है। पार्टी की उत्तराखंड प्रभारी सोनम बगवाड़ी ने कहा कि यह बयान केवल नौ सेकंड की क्लिप में है, जिसे भाजपा ने काटकर पेश किया है। उन्होंने कहा कि माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह बयान संदर्भ से बाहर लिया गया है।
सोनम बगवाड़ी ने बताया कि अखिलेश यादव का बयान वास्तव में प्रवासी मजदूरों के बारे में था। उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जो घुसपैठिया वाला बयान दिया, वह सिर्फ नौ सेकंड की एक क्लिप है, जिसको भारतीय जनता पार्टी ने काटकर चलाना शुरू कर दिया।" उनका यह बयान उन मजदूरों की स्थिति पर था जो दूसरे राज्यों में काम के लिए आते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन लोगों को अक्सर घुसपैठिया कहा जाता है। भाजपा और मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करने के संदर्भ में उनका बयान आया था।सोनम बगवाड़ी ने कहा, "यदि इस तर्क से देखा जाए, तो मुख्यमंत्री भी किसी अन्य राज्य से आते हैं, फिर क्या उन्हें भी घुसपैठिया कहा जाएगा?" उनका कहना था कि घुसपैठिया शब्द की परिभाषा स्पष्ट होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे का इस्तेमाल चुनावों के समय करती है, लेकिन कभी यह नहीं बताया जाता कि घुसपैठिया किसे कहा जाता है।
भाजपा के आरोपों का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि "जो बांग्लादेशी लोग आ रहे हैं, जो गैरकानूनी तरीके से India में आए हैं, उनको घुसपैठिया कहा जाता है। लेकिन अगर आप डेटा को देखें, तो पिछले 12-14 साल में, जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश में है, तब से कुल 4,000 घुसपैठिए इस देश से बाहर भेजे गए हैं।"
सोनम बगवाड़ी ने कहा कि अखिलेश यादव ने उत्तराखंड या वहां के लोगों के बारे में कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की। उनका बयान केवल प्रवासी मजदूरों के हक में था। उन्होंने कहा, "इस पूरे बयान को संदर्भ से अलग करके प्रचारित किया गया है।"
वहीं, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सपा प्रमुख की टिप्पणी पर कहा कि "इसमें गठबंधन का कोई सवाल नहीं है।" उन्होंने कहा कि गलत बयान कोई दे सकता है, लेकिन हमें यह मानना चाहिए कि हमारा राज्य, जो उत्तर प्रदेश का हिस्सा था, वह उत्तराखंड के लोगों का भी था।
हरीश रावत ने कहा, "हमारे लाखों बेटे उत्तर प्रदेश की राजकीय सेवाओं में कार्यरत थे और आज भी हैं।" उनके मुताबिक, जहां कोई व्यक्ति रहता है, वह वहीं का नागरिक है। रावत ने टिप्पणी की कि "घुसपैठिया कैसे कहा जा सकता है?" इसके साथ, उन्होंने योगी आदित्यनाथ की बातों का हवाला देते हुए कहा कि इसलिए यह मामला उठाया गया था।
इस बिंदु पर ध्यान देते हुए रावत ने कहा कि शब्द "उत्तराखंड" से उनकी भावना आहत हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वयं अखिलेश यादव अपने बयान को सही करेंगे। यह मामला राजनीतिक जमीन पर गहराई से जुड़ा हुआ है और इसे लेकर दोनों दलों के बीच तकरार की आहट सुनाई दे रही है।
सोनम बगवाड़ी का बयान स्पष्ट करता है कि भाजपा घुसपैठिए की परिभाषा को अपनी सुविधा अनुसार इस्तेमाल कर रही है। इस पर उनकी चिंता है कि, "भाजपा किन लोगों को घुसपैठिया मानती है और किस आधार पर यह आरोप लगाया जाता है।"
इस मामले ने राजनीतिक गर्मी को बढ़ा दिया है। सपा और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह खेल आगामी चुनावों में और भी तेज होगा। घुसपैठिये शब्द का इस्तेमाल इस तरह से किया जाना चाहिए कि वह किसी विशेष वर्ग को निशाना न बनाए।
घुसपैठिया शब्द का प्रयोग कैसे किया गया, इस पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है। इस विषय की गंभीरता को देखते हुए, सभी राजनीतिक दलों को इस मामले में संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। यदि प्रवासी मजदूरों को घुसपैठिया कहा जाता है, तो उन्हें सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए, इसके बिना समाज में विभाजन बढ़ सकता है।
यह ताजा विवाद हमें याद दिलाता है कि राजनीति में शब्दों का बहुत महत्व होता है। ऐसे विवादों को सुलझाने के लिए संवाद बहुत जरूरी है और विशेषकर जुड़े लोगों की भलाई के लिए सार्थक चर्चा आवश्यक है।
सारांश में, यह विवाद एक बार फिर से राजनीतिक गर्माहट की चिंगारी को भड़काने का कार्य कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि कैसे विभिन्न दल इस मुद्दे को समझते हैं और इसे जनता के समक्ष कैसे पेश करते हैं।