मिशिगन में डेमोक्रेट अब्दुल एल-सैयद की जीत में कर्नाटक के भटकल का अहम योगदान

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Navbharat Times
मिशिगन के नए डेमोक्रेट सीनेटर अब्दुल एल-सैयद की कहानी भारत के कर्नाटक से जुड़ी हुई है। उनका परिवार भारतीय मूल का है, खासकर उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू, जिनकी जड़ें कर्नाटक के भटकल से हैं। 42 वर्षीय एल-सैयद ने हाल ही में रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स को हराकर सीनेट का चुनाव जीता। उन्होंने यह चुनाव लगभग 52 प्रतिशत के मुकाबले 46 प्रतिशत मतों से जीता। अब्दुल एल-सैयद पूर्व डेमोक्रेटिक सीनेटर गैरी पीटर्स की जगह लेंगे।

एल-सैयद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकू की परवरिश मिशिगन में हुई। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका आकर बसे थे। सारा के पिता, डॉ. तैयब जुकाकू भटकल के रहने वाले हैं और किडनी रोग विशेषज्ञ हैं। उनके दादा, जेएच शम्सुद्दीन जुकाकू वकील थे और उन्होंने पूर्व मैसूर राज्य सरकार में उप वित्त मंत्री की भूमिका निभाई थी। जुकाकू परिवार नावायत समुदाय से जुड़ा है, जो एक मुस्लिम व्यापारी समुदाय है।
सारा ने मिशिगन विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र और नियर ईस्टर्न स्टडीज की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री प्राप्त की। एल-सैयद और सारा की पहली मुलाकात मिशिगन विश्वविद्यालय में मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन के जरिए हुई थी। उन्होंने 2006 में विवाह किया और उनके दो बेटियां हैं।

एल-सैयद का नाम उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ राजनीतिक विवाद में सामने आया है। वेंस की पत्नी उषा वेंस भारतीय-अमेरिकी हैं। पिछले अगस्त में, एल-सैयद ने वेंस पर कही गई टिप्पणी के संदर्भ में कहा, "उनके बच्चे भी उतने ही अमेरिकी हैं जितने किसी अन्य अमेरिकी परिवार के बच्चे।" इस पर मिशिगन रिपब्लिकन पार्टी की सह-अध्यक्ष सनी रेड्डी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उषा वेंस की भारतीय विरासत को राजनीतिक मजाक का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

चुनाव प्रचार के दौरान, दक्षिण एशियाई और भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने एल-सैयद का समर्थन किया। इसी क्रम में 30 अक्टूबर को वेस्टलैंड, मिशिगन में दिवाली कार्यक्रम 'लाइट अप द वोट' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न सामुदायिक नेता शामिल हुए। एल-सैयद ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों के साथ दीप जलाया और उन्हें मतदान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा, "लोगों को अपनी आवाज उठाने और मतदान के जरिए लोकतंत्र को मजबूत बनाने का साहस दिखाना चाहिए।"

एल-सैयद का जन्म अमेरिका में हुआ था, लेकिन उनके पिता मोहम्मद मिस्र से प्रवासी थे। उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की और ऑक्सफोर्ड में रोड्स स्कॉलर के रूप में डॉक्टरेट की पढ़ाई की। इसके बाद, उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री ली। 2015 में, डेट्रॉयट के मेयर ने उन्हें शहर का स्वास्थ्य निदेशक बनाया।

उन्होंने कई महत्वाकांक्षी योजनाएँ चलाईं, जैसे बच्चों को मुफ्त चश्मा देना और ओवरडोज के मामलों में नारकन दवा की उपलब्धता बढ़ाना। 2017 में, उन्होंने मिशिगन के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन 2018 में डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हार गए। उस समय भारतीय मूल के कारोबारी श्री थानेदार भी चुनाव में शामिल थे। बाद में थानेदार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य बने।

एल-सैयद ने राजनीतिक टिप्पणीकार के रूप में भी काम किया। उन्होंने 'हीलिंग पॉलिटिक्स' और 'मेडिकेयर फॉर ऑल: ए सिटिजन गाइड' जैसी किताबें लिखीं। 2022 के अंत से लेकर अप्रैल 2025 तक, वह वेन काउंटी के स्वास्थ्य, मानव एवं पूर्व सैनिक सेवा विभाग का नेतृत्व करते रहे। इस दौरान, उन्होंने लगभग तीन लाख लोगों के 70 करोड़ डॉलर तक के चिकित्सा ऋण को माफ करने की योजना शुरू की।

सीनेट चुनाव में, स्वास्थ्य सेवाओं की सार्वभौमिक उपलब्धता उनकी प्राथमिकताओं में से एक थी। वह 'मेडिकेयर फॉर ऑल' का समर्थन करते हैं। विदेश नीति मुद्दों पर, उन्होंने गाजा युद्ध को नरसंहार बताया और इजरायल को हथियारों की आपूर्ति पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।

एल-सैयद ने सीनेट की स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम एवं पेंशन समिति में शामिल होने की इच्छा जताई है। इसके साथ ही, उन्होंने विदेश संबंध समिति में भी रुचि दिखाई है। उनकी पृष्ठभूमि और विचारधारा से यह स्पष्ट है कि वह अपने समुदाय और देश के लिए एक सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका यह राजनीतिक सफर भारतीय मूल के अमेरिकी परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बन सकता है।

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