भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार 2030 तक 56 65 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद, रिपोर्ट में खुलासा
भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार 2030 तक 56-65 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद, रिपोर्ट में खुलासा
NewsPoint•
नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्राइवेट क्रेडिट बाजार 2030 तक 56-65 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह आंकड़ा 2025 में 21.8 अरब डॉलर तक था। यहां चौगुनी वृद्धि और 21-24 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) की संभावना जताई गई है। केयरएज रेटिंग्स ने इस रिपोर्ट में बताया कि भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार अभी विकास के शुरुआती चरण में है। वर्तमान में, भारत की जीडीपी में प्राइवेट क्रेडिट की हिस्सेदारी सिर्फ 0.6 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका में यह 4.4 प्रतिशत और ब्रिटेन में 8.4 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में भविष्य में काफी संभावनाएं हैं। भारत का क्रेडिट-टू-जीडीपी अनुपात, जो आमतौर पर 90 से 102 प्रतिशत के बीच रहता है, 2022 में घटकर 88.3 प्रतिशत रह गया था। लेकिन फिर 2023 में यह बढ़कर 93.8 प्रतिशत, 2024 में 95.3 प्रतिशत, और 2025 में 102.3 प्रतिशत होने की उम्मीद है। वहीं, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में यह अनुपात 140 प्रतिशत से 200 प्रतिशत के बीच रहता है।प्राइवेट क्रेडिट मध्यम आकार की कंपनियों, विकासशील व्यवसायों और उन व्यवसायों को वित्तपोषण प्रदान कर रहा है जिनके पास पर्याप्त संपत्तियां नहीं हैं। ये वे क्षेत्रों हैं जहां पारंपरिक ऋणदाताओं से ज्यादा मदद नहीं मिल पाती। मुख्य कारणों में बैंकों के सख्त ऋण नियम, विशिष्ट जरूरतों के अनुसार वित्तपोषण की बढ़ती मांग और दिवाला व कर्ज वसूली के मजबूत उपाय शामिल हैं।
केयरएज एडवाइजरी की सीनियर डायरेक्टर, तन्वी शाह ने कहा, "लचीली पूंजी की बढ़ती कॉरपोरेट मांग के चलते भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार 2030 तक 56-65 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। मानकीकृत ऋण उत्पादों से इतर वित्तपोषण की मांग इस वृद्धि को समर्थन देगी। डायरेक्ट लेंडिंग, वेंचर डेट, स्पेशल सिचुएशंस और रियल एस्टेट क्रेडिट इस विस्तार को गति देंगे।"
शाह ने आगे कहा कि बाजार की इस वृद्धि को टिकाऊ रिटर्न में बदलने के लिए अनुशासित ऋण मूल्यांकन, जोखिम के अनुसार ब्याज दरें और मजबूत ऋण शर्तों का होना बहुत जरूरी है।
केयरएज एडवाइजरी के असिस्टेंट डायरेक्टर, कल्पेश मंत्री ने यह भी बताया कि "प्राइवेट क्रेडिट पारंपरिक ऋण व्यवस्था की जगह लेने के बजाय उसके साथ मिलकर काम करेगा।" यह उन कर्जदारों के लिए लचीले और उपयोग के अनुरूप वित्तपोषण समाधान उपलब्ध कराएगा, जिन्हें पारंपरिक माध्यमों से पर्याप्त ऋण नहीं मिल पाता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निकट भविष्य में डायरेक्ट लेंडिंग, वेंचर डेट और रियल एस्टेट डेट प्राइवेट क्रेडिट क्षेत्र की सबसे तेजी से बढ़ने वाली रणनीतियां बनी रहेंगी। इस प्रकार, भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण वृद्धि देखने को तैयार है।