करवा चौथ का व्रत: पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए महिलाएं करती हैं पूजा

NewsPoint•
Navbharat Times
करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास है। यह पर्व हर साल मनाया जाता है, जब महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख और खुशहाल जीवन की दुआ करती हैं। इस दिन, महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को, वे भगवान गणेश, माता पार्वती और करवा माता की पूजा करती हैं। इसके बाद, करवा चौथ की कथा सुनती या पढ़ती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं।

प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार एक साहूकार की सात बेटे और एक बेटी थी, जिसका नाम करवा था। शादी के बाद करवा चौथ पर वह अपने मायके आई और पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखा। जैसे-जैसे शाम हुई, उसे भूख और प्यास महसूस हुई। उसके भाइयों ने उसकी इस परेशानी को देखा। उन्होंने दूर पेड़ पर दीप जलाकर छलनी से छिपी रोशनी दिखाई और कहा कि चंद्रमा निकल आया है। करवा ने उस रोशनी को चंद्रमा समझ लिया और व्रत खोलने के लिए बैठ गई। जैसे ही उसने पहला निवाला लिया, उसे अपने पति के अनिष्ट का समाचार मिला। यह सुनकर वह बहुत दुखी हुई और भगवान गणेश और करवा माता से प्रार्थना की। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर देवी-देवताओं ने उसकी मनोकामना पूरी की और उसके पति को जीवनदान मिला।
इस घटना के बाद, करवा चौथ के व्रत में सही विधि से पूजा करने, कथा पढ़ने और चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व और बढ़ गया।

करवा चौथ की पूजा की विधि बेहद सरल है। सबसे पहले, सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिनभर व्रत रखने के बाद, शाम को पूजा स्थल पर भगवान गणेश, माता पार्वती और करवा माता की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद, करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में, चंद्रमा के दर्शन करके उसे अर्घ्य दें और अपने पति की लंबी उम्र तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

इस प्रकार, करवा चौथ का व्रत सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि प्यार और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व महिलाओं को उनके परिवार के प्रति प्रेम और उनकी भलाई की रक्षा के लिए प्रेरित करता है।

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