मध्य प्रदेश के 12 जिलों में सूखे की स्थिति, किसानों की मदद के लिए निर्णय

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मध्य प्रदेश के 12 जिलों में सूखे की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि इन जगहों पर 80 प्रतिशत से कम बारिश हुई है। प्रदेश सरकार ने इस समस्या पर चर्चा की और किसानों की मदद का फैसला लिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2026 को किसान कल्याण वर्ष के तौर पर मनाने की योजना है, ताकि किसानों की हर जरूरत को पूरा किया जा सके। कम बारिश वाले 12 जिलों को सूखे की श्रेणी में रखा जाएगा और राज्य सरकार इसके अनुसार मदद करेगी।

मंत्रिमंडल की बैठक में और भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। पर्यावरण संरक्षण के लिए 2,050 करोड़ 3 लाख रुपए की राशि 'कैम्पा' फंड से खर्च करने की अनुमति दी गई। इसके साथ ही, जन-स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,743 करोड़ 58 लाख रुपए और सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं के लिए 651 करोड़ 25 लाख रुपए का भी आवंटन किया गया है।
साथ ही, प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए नवगठित जिलों जैसे निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के मजबूत संचालन और नागरिक आपूर्ति निगम से जुड़े उपार्जन प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। इससे प्रशासनिक कामकाज में सुधार होगा।

छिंदवाड़ा, मुरैना और सागर की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3,378 करोड़ 69 लाख रुपए की मंजूरी दी गई है। इसमें छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना के लिए 2,611 करोड़ 13 लाख रुपए का आवंटन शामिल है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य छिंदवाड़ा जिले के 1,90,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के जरिए पानी पहुंचाना है।

सागर में पंचमनगर सिंचाई कॉम्प्लेक्स भी एक बड़ा प्रोजेक्ट है। इसमें पगरा बांध और पंचमनगर बैराज का निर्माण हो चुका है। पगरा बांध के जरिए सागर और दमोह जिले की 25,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई का काम होगा। पंचमनगर सिंचाई कॉम्प्लेक्स के कामों को जारी रखने के लिए 39 करोड़ 41 लाख रुपए की स्वीकृति भी दी गई है।

राज्य सरकार किसानों, पर्यावरण और जन स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है। इस तरह के फैसले किसानों के हित में और विकास के लिए आवश्यक हैं। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए उठाए गए कदम सराहनीय हैं और आने वाले समय में इनसे निश्चित रूप से सुधार होगा।

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