देवउठनी एकादशी 2026: भद्रा के असर के साथ पूजा नियम और शुभ मुहूर्त का विवरण
देवउठनी एकादशी 2026: भद्रा के असर के साथ पूजा नियम और शुभ मुहूर्त का विवरण
NewsPoint•
देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और जगत का संचालन पुनः शुरू करते हैं। इस साल यह एकादशी 20 नवंबर 2026 को पड़ रही है। इस एकादशी पर भद्रा का साया रहने वाला है, जिससे पूजा के नियमों पर असर पड़ सकता है। भद्रा को वैदिक ज्योतिष में अशुभ माना जाता है, इसलिए इस समय पूजा और शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। लेकिन पंडित नरेंद्र उपाध्याय का कहना है कि इस दिन पूजा के नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, क्योंकि भक्त भद्रा से पहले और सूर्यास्त के बाद पूजा कर सकते हैं।
देवउठनी एकादशी का महत्व बहुत अधिक है। इस दिन लोग शाम के समय भगवान श्रीहरि की आराधना करते हैं और उन्हें मंगल गीत गाकर जागाते हैं। कई स्थानों पर इस दिन तुलसी विवाह की भी परंपरा होती है। इसलिए भद्रा का असर इस दिन पूजा की विधि पर संशय पैदा कर रहा है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष गृहस्थ देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भद्रा शाम 07 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन सुबह 06 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी।भद्रा को अशुभ माना जाता है। जब भद्रा पृथ्वी पर रहती है, तब कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इसलिए इस दिन पूजा करने के लिए समय का सही चुनाव आवश्यक होता है। पंडित जी का कहना है कि अगर किसी कारणवश भद्रा से पहले पूजा नहीं कर पाई तो किसी भी शुभ चौघड़िया मुहूर्त में श्री हरि की पूजा की जा सकती है। इस दिन पूजा का सबसे अच्छा समय गोधूलि मुहूर्त है, जो शाम 05:22 बजे से 05:49 बजे तक रहेगा।
पंडित जी ने स्पष्ट किया कि देवउठनी एकादशी पर भद्रा का बहुत अधिक प्रभाव नहीं रहेगा। क्योंकि पूजन भद्रा से पहले किया जा सकता है। इसलिए पूजा के नियम नहीं बदलेंगे। उनका कहना था, “भद्रा काल में पूजन और शुभ कार्यों के लिए नियम मुख्य रूप से भद्रा के वास और उसकी स्थिति के आधार पर बदलते हैं।” जब भद्रा पृथ्वी पर होती है, तब उसके शुरुआती समय को सबसे ज्यादा अशुभ माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्य की सख्त मनाही होती है। भद्रा का अंतिम भाग, जिसे पुच्छ कहते हैं, उसे शुभ और लाभकारी माना जाता है।
इस एकादशी पर पूजन के लिए शुभ मुहूर्त की जानकारी भी महत्वपूर्ण है। एकादशी तिथि 20 नवंबर 2026 को सुबह 07:16 पर शुरू होगी और 21 नवंबर को सुबह 06:32 पर समाप्त होगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से 12:31 तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 05:25 से रात 08:06 तक रहेगा। इस अवधि में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होने की संभावना होती है।
इस प्रकार, देवउठनी एकादशी के दिन पूजा का सही समय और नियम जानना बहुत आवश्यक है। यदि आप भद्रा के प्रभाव से डरते हैं, तो भद्रा के पुच्छ के समय पूजा करना बेहतर होगा। इस दिन के विशेष महत्व और नियमों के साथ, भक्त लोग अपनी श्रद्धा और आस्था के साथ भगवान विष्णु की पूजा करके इस पावन दिन को मनाते हैं।
इस दिन की पूजा और इसके पीछे का ज्ञान सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मकता लाने का भी एक माध्यम है। इसलिए, भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे इस दिन का सही तरीके से पालन करें और भद्रा के प्रभाव के बारे में जानें ताकि उनकी पूजा सफल हो सके।