झारखंड में 631 डॉक्टरों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू, बिना कार्यभार ग्रहण करने का मामला
झारखंड में 631 डॉक्टरों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू, बिना कार्यभार ग्रहण करने का मामला
NewsPoint•
झारखंड राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने उन 631 डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, जो नियुक्ति के बाद अपने कार्यस्थल पर नहीं पहुंचे हैं या लंबे समय से अनुपस्थित हैं। यह सभी डॉक्टर अलग-अलग वर्षों में नियुक्त हुए थे। विभाग ने उनकी पहचान की है और नियमानुसार उनकी सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह कदम राज्य के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, ये डॉक्टर विभिन्न वर्षों में नियुक्त हुए थे। इनमें 1988 में एक, 1990 में 16, 1997 में दो, 2000 में सात, 2009 में 308, 2012 में 65, 2013 में 38, 2015 में 124, 2020 में 37, 2021 में 17 और 2023 में 16 डॉक्टर शामिल हैं। इससे पहले भी स्वास्थ्य विभाग ने इसी तरह के मामलों में कार्रवाई की है। वर्ष 2025 में जेपीएससी के माध्यम से नियुक्त 86 मेडिकल ऑफिसर और 57 विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त की गई थीं। यह सभी डॉक्टर नियुक्ति के बाद कार्यभार नहीं ग्रहण कर पाए थे।इसके पीछे का उद्देश्य यह है कि रिक्त पदों के कारण राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर न पड़े। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा, "सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। हमारी प्राथमिकता है कि राज्य के प्रत्येक सरकारी अस्पताल तथा स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।" उन्होंने यह भी कहा कि "नियुक्ति के बाद कार्यस्थल पर योगदान नहीं देना या बिना उचित कारण लंबे समय तक अनुपस्थित रहना गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।"
विभाग अब रिक्तियों की स्थिति की समीक्षा कर रहा है ताकि जरूरत के अनुसार नए डॉक्टरों की नियुक्ति की जा सके। यह प्रक्रिया झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।