सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाने पर विवाद, वकीलों ने उठाए सवाल
सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाने पर विवाद, वकीलों ने उठाए सवाल
NewsPoint•
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को दो दिन और बढ़ा दिया गया है। इस फैसले पर उनके वकीलों और संगठन के अधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि अदालत की कार्यवाही में कई अनियमितताएँ हुई हैं। वकील अभिक चिमनी ने बताया कि जब वे अदालत पहुंचे, तब तक पांच दिन की हिरासत पूरी हो चुकी थी। पहले ही अदालत ने जमानतदारों के द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों को स्पष्ट नहीं माना था।
पिछली सुनवाई में न्यायाधीश ने कहा था कि दिए गए दस्तावेज़ पर्याप्त नहीं थे। इसके बाद सौरव और आशुतोष के वकील नए जमानतदारों के दस्तावेज लेकर अदालत पहुंचे। वकील अभिष्त हेल ने भी कहा कि पहले इन्हीं तथ्यों के आधार पर उन्हें पांच दिन की हिरासत में भेजा गया था और अब उनकी हिरासत को बढ़ाना सही नहीं है। तकनीकी रूप से अब उनकी न्यायिक हिरासत के छह दिन हो चुके हैं। सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने अदालत के निर्णय पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, "अदालत में जो कुछ हो रहा है, वह मजाक जैसा है।" उन्होंने कहा कि वहां कानून के पहलुओं पर उचित चर्चा नहीं हुई। रत्ना सिंह ने मामले की जांच की मांग की और कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को कैसे कुचला जा रहा है। उन्होंने इस मामले में अन्य अदालतों से भी ध्यान देने की अपील की।
सीजेपी प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने भी हिरासत बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जो कुछ हो रहा है, वह निंदनीय है।" उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या सच में अदालतों में न्याय की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए। उन्होंने यह पूछने की कोशिश की कि आखिर इन दोनों नेताओं ने ऐसा क्या अपराध किया है कि उनकी हिरासत बढ़ाई जा रही है।
वकील पुष्प शर्मा ने भी अदालत की प्रक्रिया की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत राजनीतिक रूप से सही दिखने की कोशिश कर रही है, जबकि उन्हें कानूनी रूप से सही होना चाहिए। उन्होंने कहा, "जो कुछ अंदर चल रहा है, वह कानून और न्याय के लिहाज से चौंकाने वाला और बेतुका है।"
इस प्रकार, सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। यह केवल उनके लिए नहीं, बल्कि समग्र न्याय व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। वकीलों का कहना है कि अदालत की कार्यवाही में जो अनियमितताएँ हैं, उन्होंने न्याय की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया है।
इस मामले को लेकर केवल कानूनी पहलुओं की ही चर्चा नहीं हो रही है, बल्कि राजनीतिक पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यह साफ है कि कानून और न्याय से जुड़े मुद्दों पर और चर्चा की आवश्यकता है।
समाज के सभी वर्गों से अपील की जा रही है कि वह इस मामले पर ध्यान दें, ताकि लोगों की मौलिक स्वतंत्रताएँ सुरक्षित रह सकें। लोग इस मामले को लेकर चिंतित हैं और अदालत की प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते दिखाई दे रहे हैं। कोर्ट में क्या हो रहा है, इस पर गहरी नजर रखने की आवश्यकता है।