झांसी जिले की राजनीतिक ताकत: उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में प्रमुखता और भाजपा का दबदबा
झांसी जिले की राजनीतिक ताकत: उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में प्रमुखता और भाजपा का दबदबा
NewsPoint•
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुंदेलखंड क्षेत्र की विशेष भूमिका है, और झांसी जिला इस क्षेत्र का दिल माना जाता है। झांसी जिले की सियासत पूरे प्रदेश को प्रभावित करती है। झांसी, जो बुंदेलखंड का द्वार भी कहलाता है, उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित है। यह जिला झांसी मंडल का प्रशासनिक मुख्यालय है। यहां की चार विधानसभा सीटें प्रदेश की 403 सीटों में महत्वपूर्ण हैं। इन चार सीटों का अपना-अपना सियासी समीकरण है।
बबीना क्षेत्र की विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की 403 में से 222वीं है। यह एक सामान्य यानी अनारक्षित सीट है। पिछले चुनाव में यहां 3,31,743 मतदाता पंजीकृत थे। वर्तमान में इस सीट पर भाजपा के राजीव सिंह 'परिच्छा' विधायक हैं। झांसी नगर की सीट को सबसे चर्चित माना जाता है। यह 403 में से 223वीं सीट है और यहां पिछले चुनाव में सबसे अधिक 4,22,164 मतदाता थे। यहां से भाजपा के रवि शर्मा विधायक हैं।मऊरानीपुर सीट 403 में से 224वीं है और यह झांसी जिले की एकमात्र आरक्षित सीट है। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां पिछले चुनाव में 4,13,770 मतदाता थे। इस सीट पर अपना दल (सोनेलाल) की डॉ. रश्मि आर्या विधायक हैं। अंततः गरौठा सीट 403 में 225वीं है। यह भी सामान्य सीट है और यहां 3,51,859 मतदाता पंजीकृत थे। यहां से भाजपा के जवाहर लाल राजपूत विधायक हैं।
हाल के विधानसभा चुनावों में झांसी की चार सीटों में से तीन पर भाजपा का कब्जा है, जबकि एक सीट सहयोगी दल अपना दल (सोनेलाल) के पास है। इस प्रकार जिले में एनडीए का प्रभाव स्पष्ट है।
भौगोलिक दृष्टि से, झांसी जिले को उत्तर में जालौन, पूर्व में हमीरपुर और महोबा, दक्षिण में मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, दक्षिण-पश्चिम में ललितपुर और उत्तर-पूर्व में मध्य प्रदेश के दतिया जिले से घेरता है। झांसी शहर 285 मीटर की ऊंचाई पर पहुंज नदी के तट पर बसा है। यह नई दिल्ली से लगभग 415 किलोमीटर दूर है।
इतिहास की बात करें तो झांसी शहर अपनी वीरता के लिए मशहूर है। शहर में मूल दीवार वाला क्षेत्र और पत्थर का किला है। 1817 से 1854 तक इस शहर का नाम बलवंतनगर था। यह मराठा राजाओं की झांसी रियासत की राजधानी थी। 1854 में इस पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया, लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने जून 1857 से लेकर जून 1858 तक यहां शासन किया।
आधुनिक झांसी अब सड़कों और रेलवे नेटवर्क के जरिए प्रदेश के कई बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा है। इस शहर के विकास में पश्चिम-पूर्व गलियारा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। झांसी जिला पहले ललितपुर से जुड़ा था, जिसे 1891 में झांसी में शामिल किया गया था। 1974 में इसे दोबारा एक अलग जिला बनाया गया।
झांसी की सियासत, उसके इतिहास और उसके विकास को समझना प्रदेश की राजनीति को जानने का अहम हिस्सा है। झांसी की राजनीतिक दिशा और विकास यात्रा सभी को प्रभावित करती है।